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New Delhi: 3 महीने से सैलरी का इंतजार कर रहे डॉक्टर भड़के, कल से हिंदू राव अस्पताल में हड़ताल

डॉक्टर्स एसोसिएशन के सदस्य डॉ संजीव चौधरी ने कहा, 'हमें 15 फरवरी को हमारी आखिरी तनख्वाह मिली थी और हमारे घरों पर वित्तीय संकट मंडरा रहा है, यहां तक ​​कि कुछ को तो उनके मकान मालिकों ने भी बेदखल कर दिया है।

Author नई दिल्ली | May 19, 2019 1:33 PM
हिंदू राव अस्पताल फोटो सोर्स-http://www.hindurao.com/

दिल्ली में हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी हालिया तीन घंटे की हड़ताल से एक कदम आगे बढ़कर अब पूरी तरह से काम बंद करने का फैसला किया है। सोमवार (20 मई) से डॉक्टरों ने सेवाओं को पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। हालांकि डॉक्टरों के संगठन का कहना है कि मरीजों पर इस हड़ताल का प्रभाव न हो इसके लिए जरूरतमंद रोगियों का अस्पताल के सामने एक खुली ओपीडी में इलाज किया जाएगा। डॉक्टरों की मांग है कि उनका तीन महीने से लंबित वेतन प्रशासन द्वारा जारी किया जाए।

15 फरवरी को मिली थी आखिरी तनख्वाहः डॉक्टर्स एसोसिएशन के सदस्य डॉ संजीव चौधरी ने कहा कि डॉक्टरों ने उनके दुख को उजागर करने के लिए आंशिक हड़ताल शुरू की थी, लेकिन लगता है कि प्रशासन ने पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए है। उन्होंने कहा,’हमें 15 फरवरी को हमारी आखिरी तनख्वाह मिली थी और हमारे घरों पर वित्तीय संकट मंडरा रहा है, यहां तक ​​कि कुछ को तो उनके मकान मालिकों ने भी बेदखल कर दिया है। एडिशनल कमिश्नर जयराज नाइक ने हमें बताया कि वेतन आने की संभावना नहीं है क्योंकि निगम के फंड पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। हमें सभी सेवाओं को रोकने पर मजबूर हैं।’

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600 करोड़ रुपए की जरूरतः उत्तरी निगम को अपने प्रमुख अस्पतालों को चालू रखने के लिए 600 करोड़ रुपये से अधिक की आवश्यकता है। पिछले साल की शुरुआत में निगम के कार्यकारी विंग ने पांच प्रमुख अस्पतालों को केंद्र को सौंपने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पार्षदों ने इस विचार को खारिज कर दिया। प्रमुख स्वास्थ्य सुविधाओं में लगभग 6,700 स्वीकृत पद हैं और वित्त विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक वेतन से स्वास्थ्य बजट का 85% बनता है जिसमें 15% से सामान ड्रग्स, उपकरण, रखरखाव आदि चीजों पर खर्च किया जाता है। तीन साल में कर्मचारियों के आंदोलन के कारण अस्पतालों का कामकाज कई बार बाधित हुआ है।

क्या कहा वरिष्ठ अधिकारियों नेः वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत वित्तीय संकट के दौरान देनदारियों की पूर्ति राज्य या केंद्र सरकार द्वारा किए जाने का प्रावधान है।’ अधिनियम के मुताबिक नागरिक निकाय केवल प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए अधिकृत है। एक अधिकारी ने कहा कि अस्पतालों को केंद्र को सौंपने का फैसला अभी नहीं किया जा सका है।

मेयर को दिल्ली सरकार से है उम्मीदः उत्तरी दिल्ली निगम के मेयर अवतार सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली सरकार द्वारा 207 करोड़ रुपये का फंड जल्द ही जारी किया जाएगा जिससे मौजूदा संकट को खत्म किया जा सकेगा। सिंह ने कहा कि अस्पतालों को केंद्र को सौंपने के प्रस्ताव पर फिलहाल विचार नहीं किया जा रहा है।

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