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रेडियो स्टेशन पर भारत विरोधी गाने बजाकर इलाकों पर अपना दावा कर रहा नेपाल, सीमा से सटे भारतीय जिलों में फैला गुस्सा

नेपाल लगातार भारत के साथ क्षेत्रीय विवाद को लेकर आक्रामक होता जा रहा है, हाल ही में नेपाल की संसद ने भारतीय क्षेत्रों को अपने हिस्से में बताने का बिल पास किया है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र देहरादून | Published on: June 21, 2020 4:15 PM
Nepal, India, Boder tension, Radio Stationsनेपाल के रेडियो स्टेशन पर अब लगातार प्रसारित हो रहे भारत-विरोधी गाने।

भारत के कड़े विरोध के बावजूद तीन इलाकों पर दावे के साथ नया नक्शा पास करने वाली नेपाल सरकार ने अब भारतीयों को परेशान करने का नया रास्ता खोजा है। नेपाल के रेडियो स्टेशन आजकल भारत-विरोधी गानों का प्रसारण कर रहे हैं। इन गानों में नेपाली एफएम कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे भारतीय क्षेत्रों को अपने इलाके में बता रहे हैं, साथ ही इन्हें भारत से लौटाने के लिए कह रहा है। इन गानों से नेपाल की सीमा से सटे भारत के जिलों में रह रहे लोगों में खासी नाराजगी है। दरअसल, नेपाल से दूरी कम होने की वजह से नेपाली एफएम चैनल भारत के इन इलाकों में नियमित सुने जाते थे, लेकिन अब लोग एक-एक कर इन चैनलों का प्रसारण सुनना बंद कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाली एफएम चैनल इन गानों को न्यूज बुलेटिन या कुछ अन्य शो के बीच में ही प्रसारित करने लगते हैं। इनके जरिए नेपाली नेताओं पर भी भारत से अपनी जमीन न ले पाने के लिए तंज कसा जाता है।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित धारचूला की एक स्कूल टीचर बबिता सनवाल ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि कुछ समय पहले तक वो नेपाल के एफएम को सुनती थीं। लेकिन अब भारत-विरोधी एजेंडे के साथ गाने प्रसारित हो रहे हैं, इसलिए उन्होंने एफएम सुनना बंद कर दिया है। बबिता के मुताबिक, नेपाल यह गाने हर घंटे कई बार बजाता है।

सनवाल एक गाने के बोल भी सुनाती हैं- “हमरई हो त्यो कालापनी, लिपुलेख, लिम्पियाधुरा… उठा, जगा, वीर नेपाली।” एक अन्य गाने में कहा जाता है- “लिपुलेख और कालापानी हमारे होने चाहिए, यह हमारी धरती हैं, जिन्हें चुरा लिया गया है।” इसके अलावा कई अन्य गाने भी एफएम पर लगातार बजते रहे हैं। इनमें से कुछ गाने तो हाल ही में यूट्यूब पर भी डाले गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेपाली एफएम चैनल पिथौरागढ़ के धारचूला, झूलाघाट तक सुनाई देते हैं। इनमें नया नेपाल, कालापानी रेडियो, धारचूला रेडियो, लोक दर्पण, रेडियो सारथी और मल्लिकार्जुन रेडियो शामिल हैं।

नेपाल के पूर्व मुख्य सचिव एनएस नापल्च्याल के मुताबिक, नेपाल का प्रोपेगंडा बीते कुछ समय में बढ़ा है और इसका सख्ती से विरोध होना चाहिए। केंद्र सरकार या फिर राज्य सरकार को खुद एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन शुरू करना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को मौजूदा हालातों की सही जानकारी मिल सके। उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक के मतुाबिक, यह मुद्दा काफी गंभीर है। सरकार भी अब कम्युनिटी रेडियो शुरू करने पर केंद्रित है, इसमें पिथौरागढ़ के लिए भी एक स्थानीय रेडियो स्टेशन शुरू किया जाना है।

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