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रवीश कुमार ने उठाया सवाल, एक तरफ बीजिंग के बैंक से लिए जा रहे लोन, दूसरी तरफ बैन हो रहे ऐप

अपनी पोस्ट में रवीश कुमार लिखते हैं कि भारत का मीडिया चीन को लेकर शांत है। वो ऐसे शांत जैसे कुछ हुआ ही ना हो। हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि चीन ने भारत में प्रवेश नहीं किया।

Ravish Kumar, Facebook, Ravish Kumar FB Post, NDTVटेलीविजन पत्रकार रवीश कुमार। (फाइल फोटोः FB)

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार एक तरफ चीन के ऐप बैन कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजिंग के बैंकों से लोन लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब चीनी कंपनियों को भगाने का भूत शांत हो चुका है। रवीश कुमार ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रोपेगैंडा चल रहा है। चीनी सोशल मीडिया में भी भारत को लेकर एक तरह का भूत खड़ा किया जा रहा है। भारत ने चीन के खिलाफ ऐसा कर दिया, भारत ने वैसा कर दिया।

बकौल रवीश जबकि भारत ने ऐसा कुछ किया नहीं है, भारत ऐसा क्यों करेगा। शहीद तो भारत के सैनिक ही हुए हैं। उल्टे भारत ने तो संयम का परिचय दिया है। उनके मुताबिक ‘कहीं चीन में भारत के खिलाफ कोई माहौल बनाकर कोई गेम तो नहीं हो रहा है? आर्थिक तंगी से जूझ रही वहां की जनता को कोई खुराक दी जा रही हो। दूसरी तरफ भारत ने इस मामले में अभी तक कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। सेना का बयान आता है। कारगिल युद्ध के समय सेना के अधिकारी और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते थे।’

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अपनी पोस्ट में रवीश कुमार लिखते हैं कि भारत का मीडिया चीन को लेकर शांत है। वो ऐसे शांत जैसे कुछ हुआ ही ना हो। हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि चीन ने भारत में प्रवेश नहीं किया। क्या मोदी ने ऐसा बयान देकर कोई गलती कर दी है? दोनों देशों के बीच जंग के हालातों की वास्तविकता पर पर्दा पड़ा है, मगर अच्छा है कि जंग ना हो।

पत्रकार रवीश कुमार की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। फेसबुक पर राजेश शुक्ला लिखते हैं, ‘राजनीति है सब जायज है, किसी को भी सजा हो सकती है, किसी के लिए कोर्ट आधी रात को खुल सकती है और किसी मुस्लिम भाई का दुर्भाग्य से किसी जानवर से भी एक्सीडेंट हो जाए तो आप जैसे उसे बताएंगे कि भैस के गले में तो भगवा कलर का पट्टा बंधा हुआ था और उसी के बगल कुछ लोग जय श्री राम बोल रहे थे।’ गोलू यादव लिखते हैं, ‘नहीं समझेंगे लोग… पर ठीक है, अच्छा प्रयास है, बार-बार रगड़ खाने से पत्थर पर भी निशान आ जाते हैं।’

इसी तरह प्रभा उपाध्याय लिखते हैं, ‘चीन की घुसपैठ पर प्रधानमंत्री का इस तरह से खामोश रहना शंका पैदा करने वाली बात लगती है कि कहीं हमारी सीमाओं की धरती चीन को बेच तो नहीं दी, क्योंकि अपनी सम्पत्ति पर दावा तभी छोड़ा जाता है जब उसका हस्तारण किसी और को किया जाता है। वैसे भी देश की सम्पत्तियां जिस तरह से निजी हाथों में सौंपने का फैसला हम हर रोज सुन रहे हैं, सीमाओं का भी सौदा हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है।’

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