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अब पहले जैसी नहीं रही किसान की छवि, आज वो मीडिया से भिड़ गया- वायरल हो रहा रवीश कुमार का पोस्ट

एनडीटीवी पर प्राइम टाइम शो के एंकर रवीश कुमार ने लिखा कि खेती किसानी पर लगातार 22 एपिसोड से उन्हें कई सबक मिले।

farmers protest india national newsसिंघु बॉर्डर पर आग के पास खुद को गर्म रखने की कोशिश करता एक किसान। (पीटीआई फोटो)

पत्रकार रवीश कुमार ने पिछले एक महीने से जारी किसान आंदोलन पर अपनी राय दी है। उन्होंने शनिवार (26 दिसंबर, 2020) को एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि अन्नदाताओं की छवि अब पहले जैसे किसानों की नहीं रही। वो अपनी छवियों से कब का आजाद हो गया और इस आंदोलन में मीडिया और फिल्मों गढ़ी हुई उसकी छवि से भी भिड़ गया। उनकी पोस्ट सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही है। बता दें कि पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसान पिछले महीने की 26 तारीख से केंद्र के तीन नए कृषि बिलों का खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने इन बिलों को खेती और किसान विरोधी बताया है। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने तुरंत संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन बिलों को वापस लेने की मांग की है।

एनडीटीवी पर प्राइम टाइम शो के एंकर रवीश कुमार ने लिखा कि खेती किसानी पर लगातार 22 एपिसोड से उन्हें कई सबक मिले। पोस्ट के मुताबिक किसान आंदोलन ने खेती किसानी को नए सिरे से समझने का मौका दिया है। यह एक विशालकाय दुनिया है। इसे जीवन भर समझते रहना होगा। आंदोलन को लेकर मैंने प्राइम टाइम के 22 एपिसोड किए हैं। निरन्तर। काफी कुछ सीखने को मिला और बहुत कुछ सीखने से रह भी गया। खेती को समझने की यात्रा में ये 22 एपिसोड एक पड़ाव की तरह हैं। मोड़ भी कह सकते हैं।

बकौल रवीश- सरकार के दावे के समानांतर हमने खेती की अलग हकीकतों को देखने समझने का प्रयास किया। किसान की छवि भी अब किसान की नहीं है। वह अपनी छवियों से कब का आजाद हो चुका है। इस आंदोलन में वह मीडिया और फिल्मों की गढ़ी हुई छवियों से भी भिड़ गया। मीडिया से भी भिड़ गया। जानना सबसे सुंदर क्रिया है। आप जो कल होते हैं आज नहीं होते और आज होते हैं वो कल नहीं हों इसलिए पढ़ते रहिए। देखते रहिए। सुनते रहिए।

उनकी फेसबुक पोस्ट पर कुछ लोगों ने टिप्पणी भी की है। Gaurav Rastogi लिखते हैं- मियां, बड़ा दर्द है ना इस दलाल आंदोलन के फेल होने का। वैसे देश की जनता का विश्वास अब जन-आंदोलनों पर नहीं रहा। जन आंदोलन का एक प्रोडक्ट देश दिल्ली में देख ही रहा है। शुक्र करो कि तुम फर्ज़ी ही सही, पत्रकारिता की डिग्री के कंबल में छुपे बैठे हो।

Amitoj Sandhu लिखते हैं- मेनस्ट्रीम मीडिया में आपके बिना किसी ने बात नहीं की किसानों की एकाध को छोड़कर। आपने तकरीबन हर प्राईम टाईम में आंदोलन करने की वजह, व्यवस्था, स्थिति और सभी महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा की, बहुत आभार रवीश भाई।

इसी तरह Gaurav Jain कहते हैं- 2016 में फसल बीमा योजना शुरू की गई थी और 2019 तक बीमा कंपनियों को 26 हजार करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ। क्या सरकार बताएगी कि ये योजना पूंजीपतियों के लिए थी या फिर देश के किसानों का भला करने के लिए।

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