Delhi: दशहरे पर प्लास्टिक से विशालकाय रावण बनाएगा NDMC, 5 हजार घरों से मंगाया जाएगा कूड़ा

चिंतन की संस्थापक चित्रा मुखर्जी ने बताया कि हमने इसके लिए एक सफाई सेना बनाया है जो घर-घर जाकर प्लास्टिक की वस्तुए एकत्र करने का काम करेगा। साथ ही, लोगों को प्लास्टिक उपयोग नहीं करने के प्रति जागरूक भी करेगा।

Dussehra Ravan Dahan 2019: प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) इस साल दशहरा पर नए तरह का रावण बनाने की तैयारी कर रही है। रावण की यह प्रतिमा पूरी तरह से प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों और अन्य प्रकार के प्लास्टिक की वस्तुओं से बना होगा। यह जिम्मा दिल्ली की एक “चिंतन” नामक एनजीओ ने उठाया है। इस निर्माण के लिए रविवार (29 सितंबर) से डीएमआरसी क्षेत्र में प्लास्टिक की वस्तुओं को एकत्र करने का कार्य शुरू हो गया है। रावण के निर्माण के लिए लगभग पांच हजार घरों से प्लास्टिक की वस्तुए एकत्र की जाएंगी। प्लास्टिक की वस्तुओं को जोड़कर रावण की एक भव्य प्रतिमा बनाया जाएगा। इसे जला कर नष्ट नहीं किया जाएगा। इस प्रतिमा से लोगों को प्लास्टिक उपयोग नहीं करने के प्रति जागरुक किया जाएगा।

प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं करने का संदेश: चिंतन की संस्थापक चित्रा मुखर्जी ने बताया कि हमने इसके लिए एक सफाई सेना बनाया है जो घर-घर जाकर प्लास्टिक की वस्तुए एकत्र करने का काम करेगा। साथ ही, लोगों को प्लास्टिक उपयोग नहीं करने के प्रति जागरूक भी करेगा। कुछ प्लास्टिक की वस्तुए जिनके उपयोग करने से हम बच सकते है जैसे – स्ट्रा, बैग, चम्मच, चाकू आदि के बारे में भी लोगों को उपयोग नहीं करने के बारे में भी बताया जाएगा। दशहरा में प्लास्टिक के रावण का निर्माण करना। सिर्फ लोगों को प्लास्टिक उपयोग नहीं करने के प्रति जागरुक करने का एक तरिका है। जिससे की हमारा संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।

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इन क्षेत्रों से एकत्र किया जाएगा प्लास्टिक : मुखर्जी ने आगे बताया कि प्लास्टिक इकट्ठा करने का अभियान दिल्ली के पंडारा रोड, शाहजहां रोड, बापा नगर कॉलोनी, रवीन्द्र नगर कॉलोनी, लोधी रोड, लोधी कॉम्प्लेक्स और काका नगर में अगले कुछ दिनों तक चलाया जाएगा।

रावण नहीं, प्लास्टिक है हमारा दुश्मन:यह रावण इस बात का प्रतीक होगा कि आज के समय में हमारा असली दुश्मन प्लास्टिक है और हमें प्लास्टिक प्रदुषण को कम करने पर काम करना चाहिए। एनजीओं द्वारा जारी एक आकड़े के अनुसार, देश में लगभग 36 प्रतिशत तक सिंगल हैंड प्लास्टिक उपयोग होता है। इसमें दूध का पैकेट, टैट्रा पैक, कप आदि वस्तुए शामिल है। इनका उपयोग हम एक से अधिक बार नहीं कर सकते है। और यदि हम चाहें तो इसे इस्तेमाल करने से बच सकते है। इसके प्रति लोगों को ज्यादा से ज्यादा से जागरूक करने की हमारी कोशिश है ।

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