महाराष्ट्र के बाद केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुट (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (एनसीपी-एसपी) व अजित पवार के गुट वाली एनसीपी) आमने-सामने होंगे। मौजूदा समय में केरल में एनसीपी के दो विधायक हैं।
साल 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के साथ मिलकर तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था। उक्त विधानसभा चुनाव में इलाथुर सीट से एके ससींद्रन ने राष्ट्रवादी कांग्रेस केरल पार्टी के उम्मीदवार सुल्फिकार मयूरी को और कुट्टनाड सीट से थामस के थामस ने केरल कांग्रेस के जैकब अब्राहम को चुनाव में हराया था। जुलाई 2023 में हुए एनसीपी में बंटवारे के बाद यह दोनों विधायक शरद पवार की गुट वाली पार्टी में शामिल हो गए।
इस चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने शरद पवार गुट के एनसीपी को फिर से तीन सीटें दी है। इन सीटों पर मौजूदा विधायक सहित अन्य उम्मीदवार तुतारी बजाता हुआ आदमी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगा। वहीं इसके विपक्ष में अजित पवार गुट ने भी उम्मीदवार उतारने का फैसला कर लिया है। पार्टी सोमवार को अपने उम्मीदवार का एलान करेगी।
साथ ही उसी दिन उम्मीदवार नामांकन करेंगे। यह गुट ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह के साथ अपने उम्मीदवार मैदान में उतार रहा है। गौरतलब है कि चुनाव चिन्ह को लेकर चली कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के बाद अजित पवार गुट को आधिकारिक तौर पर पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मिला था, जिससे उसे संगठनात्मक बढ़त भी हासिल हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुकाबला केवल सीट जीतने का नहीं, बल्कि पार्टी के असली जनाधार को साबित करने का भी है। शरद पवार गुट जहां अपने पारंपरिक समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के भरोसे है, वहीं अजित पवार गुट चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक मजबूती के दम पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगा।
इस टकराव का असर केवल एनसीपी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्य के बड़े गठबंधनों-एलडीएफ और यूडीएफ-की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। वहां एनसीपी के दोनों गुटों की मौजूदगी समीकरण बदल सकती है।
कुल मिलाकर, केरल विधानसभा चुनाव में एनसीपी के दोनों गुटों के बीच सीधी भिड़ंत ने चुनाव को और रोचक बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य में किस गुट को जनता का ज्यादा समर्थन मिलता है और कौन अपने राजनीतिक वजूद को मजबूत कर पाता है।
चुनाव से पहले पीसी चाको ने दिया था इस्तीफा
केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शरद पवार गुट के एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष पीसी चाको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं अजीत पवार गुट वाली एनसीपी ने केरल में अपनी राज्य इकाई को मजबूत करने के लिए एनए मुहम्मद कुट्टी को केरल प्रदेश अध्यक्ष (कार्यवाहक) बनाया था। सूत्रों का कहना है कि एन ए मुहम्मद कुट्टी भी पार्टी से इस्तीफा देकर कोट्टक्कल से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।
अजीत पवार की गुट वाली एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव व मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्रजमोहन श्रीवास्तव ने बताया कि पार्टी ने केरल चुनाव में उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। सोमवार को उम्मीदवार का एलान होगा। उन्होंने कहा कि केरल चुनाव में पार्टी किसी संगठन के साथ समझौता नहीं करेगी।
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चुनाव आयोग (EC) ने रविवार को केरल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा कर दी। केरल में CPIM के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच मुकाबला देखने को मिलता रहा है। वहीं हाल के वर्षों में बीजेपी ने भी ठीकठाक प्रदर्शन किया है। केरल में 9 अप्रैल को एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे, जबकि नतीजे बाकी राज्यों के साथ 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
