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झारखंड के वीरप्पन ने नेताओं के अंदाज में दिया भाषण, कहा- नेता बनूंगा, कुंदन पाहन को सरकार ने दिए 15 लाख

खूंटी जिले का रहने वाला कुंदन 1998-99 में अपने दो बड़े भाइयों डिंबा और श्याम पाहन के साथ नक्सली में भर्ती हो गया था। उस वक्त उसकी उम्र 17 साल थी।

कुंदन को 15 लाख रुपये का चेक सौंपते पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी। (फोटो-पीटीआई)

झारखंड के रांची में रविवार को दुर्दांत नक्सली कुंदल पाहन ने सरेंडर कर दिया। पुलिस ने जब उसे मीडिया के सामने पेश किया तो उसका अंदाज नेताओं जैसा था। स्थानीय मीडिया से बातचीत में उसने राजनीति में आने की इच्छा भी जताई। झारखंड के वीरप्पन कहे जाने वाले कुंदन ने कहा कि दिसंबर 2000 में बोकारो के झुमरा पहाड़ में नेपाल के प्रधानमंत्री कमल पुष्प दहल प्रचंड के साथ उसने ट्रेनिंग ली थी। सरेंडर करने के एवज में पुलिस ने उसे डीआईजी आवास पर 15 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इस मौके पर उसकी बेटी, भाभी, चाचा और कुछ परिजन भी मौजूद थे। उन्होंने भी कुंदन के इस कदम का स्वागत किया है।

इसलिए बना था नक्सली: खूंटी जिले का रहने वाला कुंदन 1998-99 में अपने दो बड़े भाइयों डिंबा और श्याम पाहन के साथ नक्सली दल में भर्ती हो गया था। उस वक्त उसकी उम्र 17 साल थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अड़की ब्लॉक के बाड़ीगड़ा गांव में उसके परिवार की 2700 एकड़ जमीन है। उस वक्त उसके एक चाचा ने 1350 एकड़ जमीन हथिया ली थी। इसके बाद उसने हथियार उठा लिए थे। 1996 में उनके इलाके में बड़े नक्सल नेता आए थे और कुंदन का परिवार उनसे काफी प्रभावित भी हुआ था। इन लोगों ने भरोसा दिलाया था कि संगठन में शामिल होने पर पूरी जमीन वापस दिला देंगे और एेसा हुआ भी।

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इसलिए छोड़ा संगठन: कुंदन ने कहा कि संथाली नेताओं का गैर-संथालियों के प्रति रवैया खराब है। वे लोग तानाशाही रवैया अपनाते हैं। अपने बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियरिंग पढ़ाते हैं और निचले कैडर वालों से तेल और साबुन का भी हिसाब मांगा जाता है। बड़े नेता भी इस पर कुछ नहीं कहते। इसलिए वह 2014 में संगठन से अलग हो गया था और केंद्रीय कमिटी के कहने पर भी वापस नहीं लौटा। इसके बाद उसने रांची के एसएसपी कुलदीप द्विवेदी की पहल पर सरेंडर कर दिया। कुंदन ने यह भी कहा कि पुलिस के पास उसकी फोटो नहीं होने के कारण कोई उसे नहीं पहचान पाता था। वह आराम से अपने इलाके में घूमता था। कई बार पुलिस के पास से भी गुजरा। कुंदन ने कहा कि इलाके की कई गरीब लड़कियों की शादी उसने कराई है।

सभी आरोपों से कर दिया इनकार: पुलिस की प्रेस रिलीज के मुताबिक कुंदन पाहन पर हत्या, लूट समेत 128 मामले दर्ज हैं। इनमें पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या, छह पुलिसकर्मियों को विस्फोट से उड़ाने, डीएसपी प्रमोद कुमार समेत 6 पुलिसवालों को बारूदी सुरंग में उड़ाना, इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार का गला काटने के अलावा तमाड़ में ICICI बैंक की वैन से 5 करोड़ कैश और एक किलो सोना लूटना शामिल है। गला काटने की घटना से नक्सलियों और कुंदन की तुलना तालिबान से होने लगी थी। हालांकि मीडिया के आगे उसने इन सभी आरोपों से इनकार कर दिया।

अनशन पर बैठे मुंडा के बेटे: कुंदन पाहन के सरेंडर के तरीके के विरोध में दिवंगत मंत्री रमेश सिंह मुंडा के बेटे और आजसू विधायक विकास मुंडा मोरहाबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के पास अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन नक्सलियों को पुलिस को पकड़ना चाहिए था, वह उनका महिमामंडन करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां ही गलत हैं। उसे सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि नक्सलियों को सख्त सजा मिल सके। उन्होंने कहा कि बेकसूर लोगों और पुलिसवालों की हत्या करने वाले को 15 साल का चेक देना कैसा न्याय है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जाहिर किया गुस्सा: विश्वेन्दू जयपुरियार नाम के एक फेसबुक यूजर ने लिखा, नक्सली बनकर खून बहाओ, सोना लूटो और बाद में सरेंडर कर दो। ये 15 लाख का चेक युवाओं को मोटीवेट कर सकता है, बेहतर भविष्य जंगल मे तलाशने को। मेरी सलाह है कि कुंदन पहान के जन्मदिन को राजकीय महोत्सव का दर्जा देकर हर जिले में धूमधाम से मनाया जाए। साथ ही उसकी कहानी महर्षि वाल्मीकि की तरह कोर्स में शामिल कर दिया जाए।

देखें वीडियो ः

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