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ओड़ीशा में नक्सली हमले में बीएसएफ अफसर व जवान शहीद

घटना अपराह्न एक बजे की है जब बीएसएफ के करीब 20 जवानों का एक दल दस मोटरसाइकिलों पर जिले के डंडाबाड़ी गोव में संचालन संबंधी कार्य से लौट रहा था..

Author भुवनेश्वर | Updated: January 9, 2016 12:37 AM
घटना शुक्रवार अपराह्न एक बजे की है जब बीएसएफ के करीब 20 जवानों का एक दल दस मोटरसाइकिलों पर जिले के डंडाबाड़ी गोव में संचालन संबंधी कार्य से लौट रहा था।

ओड़ीशा के कोरापुट जिले के जंगलों में एक मोटरसाइकिल से गश्त लगाते वक्त नक्सलियों की ओर से किए गए बारूदी सुरंग विस्फोट में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक अधिकारी और एक जवान की मौत हो गई। यह घटना अपराह्न एक बजे की है जब बीएसएफ के करीब 20 जवानों का एक दल दस मोटरसाइकिलों पर जिले के डंडाबाड़ी गांव में संचालन संबंधी कार्य से लौट रहा था। इसी दौरान टीम कमांडर और उनके जवान वाली पहली बाइक कच्चे रास्ते पर छिपाकर लगाए गए बम में हुए विस्फोट की चपेट में आ गई।

बाइक चला रहे जवान कांस्टेबल एसपी पांडा की मौके पर मौत हो गई जबकि बाइक पर पीछे बैठे दल कमांडर उपकमांडेंट सुनील कुमार बेहरा ने बाद में दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने कहा कि नक्सलियों द्वारा सड़क के नीचे छिपाकर लगाए गए आइईडी से हुए विस्फोट में दो लोगों को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा कि इस विस्फोट इतना तेज था कि बाइक हवा में उछल गई और बाइक पर सवार बाकी की नौ टीमों ने छिपे माओवादियों से मुठभेड़ के संदेह में अपनी जगह ले ली।

कोरापुट पुलिस ने कहा कि हथियारों से लैस माओवादियों के एक समूह ने गुरुवार देर रात जिले के डंडाबाड़ी गांव में बापी सामंत नाम के एक व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि बारूदी सुरंग विस्फोट का स्थल डंडाबाड़ी से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर है। अधिकारियों ने कहा कि वाम चरमपंथ से प्रभावित क्षेत्रों में जंगल के रास्तों में आइईडी और छिपे विस्फोट में फंसने से बचने के लिए जवान चार पहिया वाहनों का बहुत कम इस्तेमाल करते हैं और आवागमन के लिए मोटरसाइकिलों पर भरोसा करते हैं।

बीएसएफ ने इस घटना पर ‘कोर्ट आफ इंक्वायरी’ गठित की है और विस्फोट वाले क्षेत्र और आस पास के गांवों में खोजी अभियान के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है। इससे पहले ओड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि वामपंथी उग्रवाद राज्य के लिए प्रमुख चिंता बना हुआ है। हम अपने पड़ोसी राज्यों के सीमाई क्षेत्रों में इस समस्या को काबू करने में सक्षम हुए हैं लेकिन बोलांगीर, कालाहांडी, कंधमाल और बौध जिलों में माओवादी उग्रवादियों की हालिया गतिविधियां चिंताजनक हैं।

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