पंजाबः सिद्धू ने अपना इस्तीफा लिया वापस, बोले- जिस दिन पंजाब को नया एजी मिलेगा, उसी दिन फिर से लेंगे चार्ज

नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस प्रमुख पद से दिया गया अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से विवाद के बाद सिद्धू ने सरकार बनने के कुछ दिन बाद ही इस्तीफा दे दिया था।

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सिद्धू ने वापस लिया अपना इस्तीफा (फोटो- ANI)

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लिया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वो पंजाब प्रदेश अध्यक्ष का चार्ज उसी दिन संभालेंगे, जिस दिन राज्य को नया एजी मिलेगा।

चन्नी के सीएम बनने के कुछ दिन बाद ही पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से सिद्धू ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने उनका इस्तीफा नहीं स्वीकार किया था। एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए, सिद्धू ने कहा कि जिस दिन पंजाब को नया महाधिवक्ता (एजी) मिलेगा, उसी दिन वो कार्यभार ग्रहण करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि “जब आप सच्चाई के रास्ते पर होते हैं तो पोस्ट मायने नहीं रखते।”

सिद्धू का यह फैसला एडवोकेट जनरल एपीएस देओल के अपने पद से इस्तीफा देने और पंजाब सरकार द्वारा पुलिस महानिदेशक के पद पर नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग को 10 नामों की सूची भेजे जाने के बाद आया है। सिद्धू 19 जुलाई को पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नियुक्त किए गए थे। इनकी ताजपोशी, कैप्टन-सिद्धू विवाद को खत्म करने के लिए की गई थी, हालांकि इसके बाद भी विवाद जारी रहा और कुछ दिन बाद ही कैप्टन ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाया था।

चन्नी के सीएम बनने के बाद कुछ दिनों तक तो सिद्धू ठीक रहे, फिर उनका चरणजीत सिंह चन्नी के साथ भी विवाद हो गया। बताया जाता है कि नई सरकार में मंत्रियों को विभागों के आवंटन से सिद्धू नाराज थे, इसलिए उन्होंने इसके बाद ही इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे अपने त्याग पत्र में सिद्धू ने लिखा- “मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब के कल्याण के एजेंडे से कभी समझौता नहीं कर सकता। इसलिए मैं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं। कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा।”

सिद्धू के इस्तीफे के पीछे एक कारण यह भी था कि कांग्रेस सरकार वरिष्ठ अधिवक्ता एपीएस देओल को अपना महाधिवक्ता नियुक्त कर दी थी। इसके चलते सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई, क्योंकि देओल हाल तक प्रदर्शनकारियों पर बेअदबी और पुलिस फायरिंग की घटनाओं के दौरान पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के वकील रह चुके थे।

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