Naresh Agarwal : कभी राजनाथ सिंह के खिलाफ लिया था संकल्प, चार पार्टियों के टिकट पर सात बार बन चुके हैं विधायक

Naresh Agarwal Rajnath Singh : हिरणयकश्यप के साथ संबंधों के चलते हरदोई जिले की अपनी पौराणिक मान्यताएं हैं लेकिन राजनीति की धुरी में यहां सिर्फ एक ही नाम चलता है और वह नाम है नरेश अग्रवाल (Naresh Agarwal)।

Naresh Agarwal Rajnath Singh
किसी जमाने में Naresh Agarwal और Rajnath Singh के बीच थी तनातनी (फाइल फोटो)- सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Naresh Agarwal Rajnath Singh : हिरणयकश्यप के साथ संबंधों के चलते हरदोई जिले की अपनी पौराणिक मान्यताएं हैं लेकिन राजनीति की धुरी में यहां सिर्फ एक ही नाम चलता है और वह नाम है नरेश अग्रवाल (Naresh Agarwal)। नरेश अग्रवाल को उत्तर प्रदेश की राजनीति का मौसम विशेषज्ञ भी माना जाता है। अपने चार दशक लंबे राजनीतिक सफर में वह (Naresh Agarwal) यूपी की चार प्रमुख पार्टियों के प्रमुख पदों पर रह चुके हैं। इन दिनों वह भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं। 2018 में समाजवादी पार्टी के साथ उपजे मनमुटाव के बाद वह बीजेपी में शामिल हुए थे। उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों से पहले उनके नाम पर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि सपा की तरफ से उन्हें दोबारा पार्टी में आने का ऑफर दे दिया है लेकिन नरेश अग्रवाल (Naresh Agarwal) ने इसे ठुकरा दिया है।

नरेश अग्रवाल, आज खुद को भाजपा का कद्दावर नेता मानते हैं लेकिन किसी जमाने में उन्होंने राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) की सरकार गिराने की बात की थी। घटना 9 अगस्त 2009 की है, अग्रवाल ने सरकार में रहते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर दी। इस पर राजनाथ सिंह ने उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। समाचार पोर्टल लल्लन टॉप को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें पार्टी से निकालने का दबाव पिछले कई दिनों से चल रहा था। उनके खिलाफ बयानबाजी भी हो रही थी। बकौल नरेश अग्रवाल, मैं विदेश यात्रा पर गया तो इस बीच कुछ साथियों को लालच देकर किनारे कर दिया गया था।

नरेश अग्रवाल बताते हैं जब हरिद्वार से सेशन चल रहा था तो बीजेपी के आंदोलनों और बयानबाजी के खिलाफ मैंने कहा था कि मुख्यमंत्री के खिलाफ यह काम तो हम भी कर सकते हैं। उन्होंने हरिद्वार से राजनाथ सिंह के खिलाफ संकल्प लिया था। वह कहते हैं कि राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के खिलाफ मेरा संकल्प पूरा भी हुआ था, ये बात अलग है कि राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) का भी संकल्प पूरा हुआ था। लेकिन उनकी सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाई थी लेकिन इस बीच नरेश अग्रवाल, मुलायम सिंह यादव की साइकिल पर सवार हो चुके थे।

लल्लनटॉप के इंटरव्यू में साल 2017 में नरेश अग्रवाल (Naresh Agarwal) ने बताया था कि उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु के सामने कसम खाई थी कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं भारतीय जनता पार्टी में नहीं जाउंगा। यह कसम उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़कर लोकतांत्रिक कांग्रेस गठन से पहले की थी। लेकिन 2018 में वह समाजवादी पार्टी द्वारा राज्यसभा का टिकट जया बच्चन को देने से इतने नाराज हो गए थे कि पार्टी से इस्तीफा ही दे दिया।

सात बार चार अलग-अलग पार्टियों से विधायक बने: उत्तर प्रदेश की राजनीति में नरेश अग्रवाल (Naresh Agarwal) की खासी अहमियत मानी जाती है। करीब 4 दशक की राजनीति में वह सात बार चार अलग-अलग पार्टियों से विधायक रह चुके हैं। 1980 में वह पहली बार हरदोई से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 1989 में निर्दलीय उम्मीदार बनकर जीते, कांग्रेस के टिकट पर 1991, 93 और 96 में जीते। 1997 से लेकर 2001 तक बीजेपी सरकार में मंत्री रहे। 2002 में सपा के टिकट पर लड़े और 2004 तक मुलायम सरकार में पर्यटन मंत्री रहे। 2007 में सपा के टिकट पर लड़े और जीते भी लेकिन सूबे में बसपा की सरकार बनी तो मायावती के सिपलसिलार बन गए। 2012 में फिर मायावती का साथ छोड़ा और सपा के साथी बन गए। फिलहाल इन दिनों बीजेपी की शरण में हैं।

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।