कल देश के इस सबसे लंबे पुल का उद्घाटन करेंगे पीएम नरेंद्र मोदी, चीन सीमा के पास जल्दी पहुंच सकेंगे सैनिक

देश का सबसे लंबा 9.15 किलोमीटर लंबा ये पुल मुंबई स्थित प्रसिद्ध बांद्रा-वर्ली सी लिंक (5.6 किलोमीटर) से भी करीब दो-तिहाई लंबा है।

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नरेंद्र मोदी सरकार मई 2017 में अपने कार्यकाल का तीन साल पूरा कर रही है। (एजेंसी फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (26 मई) को असम स्थित देश के सबसे बड़े पुल का उद्घाटन करेंगे। ये पुल ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित ढोला को उत्तरी तट पर स्थित सादिया से जोड़ेगा। 9.15 किलोमीटर लंबा ये पुल मुंबई स्थित प्रसिद्ध बांद्रा-वर्ली सी लिंक (5.6 किलोमीटर) से भी करीब दो-तिहाई लंबा है। इस पुल के बनने से पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में संचार सुविधा काफी बेहतर हो जाएगी। इस पुल का सबसे बड़ा लाभ भारतीय सेना को होगा। पुल से सेना को असम से अरुणाचल प्रदेश स्थित भारत-चीन सीमा तक पहुंचने में तीन से चार घंटे कम लगेंगे। इस सीमा पर भारत की किबिथू, वालॉन्ग और चागलगाम सैन्य चौकियां हैं।

पुल की लागत 10 हजार करोड़ रुपये है। इसे बनाने में होने वाली देरी के चलते इसकी लागत बढ़ गई। पुल के साथ ही उसे दूसरी सड़कों से जोड़ने के लिए 28.5 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण भी किया गया है। बोगीबील नामक एक और पुल के जल्द ही शुरू हो जाने के बाद पूर्वी अरुणाचल प्रदेश से एटानगर तक तक जाने में लगने वाला समय 4-5 घंटे कम हो जाएगा।

सादिया मशहूर गायक भूपेन हजारिका की जन्मभूमि है। 15 अगस्त 1950 को आए भारी भूकंप के पहले ये शहर काफी गुलजार रहा करता था। 82 वर्षीय भाबा गोगोई कहते हैं, “तब मैं बच्चा था। ब्रह्मपुत्र ने अपना रास्ता बदल दिया और आधा सादिया कुछ ही दिनों में उसकी गोद में समा गया। बाकी 1970 में। भगवान का शुक्र है कि मैं अपने जीवनकाल में इस एक समय अभागे माने जाने वाले इलाके में ये पुल बनते देख पाया।” कह सकते हैं कि ये पुल अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की पहल की देन है। मई 2003 में राज्य सभा सांसद अरुण कुमार सरमा और सादिया के विधायक जगदीश भुयन ने तत्कालीन पूर्वोत्तर विकास मंत्री सीपी ठाकुर को पत्र लिखकर पुल बनाने की मांग की थी।

असम गण परिषद के इन दोनों नेताओं के पत्र के बाद जून 2003 में असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुकुट मिथि ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखकर ये पुल बनाने की मांग की थी। सीएम मुकुट ने पीएम अटल को लिखे पत्र में पुल बन जाने से चीन सीमा तक भारत की पहुंच को आसान बनाने की भी बात लिखी थी। अगस्त 2003 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पुल बनने की संभावना का जमीनी अध्ययन पूरा कर लिया। पुल की मंजूरी मिलने के बाद इसका निर्माण 2011 में शुरू हुआ। दिसंबर 2015 में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ।

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