ताज़ा खबर
 

बंद दायरे से बाहर निकलें लोकसेवक : मोदी

प्रधानमंत्री ने लोक सेवकों से कहा कि वे लोगों से बेहतर संपर्क बनाएं ताकि सरकार की योजनाओं एवं पहल को जमीन पर बेहतर ढंग से लागू किया जा सके।

Author नई दिल्ली | April 22, 2016 12:02 AM
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोक सेवकों से कहा कि वे बंद दायरे में काम करने की बजाए देश के विकास और लोगों के कल्याण के लिए बदलाव के वाहक बने। लोक सेवा दिवस पर लोक सेवकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उनसे वृहद, बेहतर परिणाम के लिए जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के साथ बदलाव लाने के लिए प्रयोग करने को कहा। मोदी ने कहा, ‘कुछ लोग बंद दायरे में एकाकी रूप से काम करते हैं। हमें एकाकी रूप से काम करने की बजाए टीम के रूप में काम करने से अधिक परिणाम प्राप्त होते हैं। हमें बंद दायरे से बाहर निकलने की जरूरत है और राष्ट्र निर्माण के लिए एक टीम के रूप में साथ मिल कर काम करने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि लोक सेवकों का कार्य पहले नियामक की तरह था लेकिन कुछ समय के बाद यह भूमिका बदलकर प्रशासक और फिर नियंत्रक की हो गई।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘समय जब फिर बदला तब आप (लोक सेवकों) ने प्रबंधन कौशल हासिल करने के बारे में सोचा। समय बदल रह है। केवल प्रशासक और नियंत्रक होना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति की यह जरूरत है और हर स्तर पर जरूरी है कि आप बदलाव के वाहक बने।’ उन्होंने कहा कि हमें बदलाव लाने की जरूरत है। जब हम एक स्थान पर पहुंच जाते हैं तब प्रयोग करना भूल जाते हैं। अगर हम प्रयोग नहीं करेंगे तब हम किस प्रकार से बदलाव ला पाएंगे। काम के बिना प्रयोग नहीं हो सकता है। तब यह सिर्फ काम होगा। मैं हमेशा प्रयोगों की सराहना करता हूं। जो लोग अलग तरीके से काम करते हैं, प्रयोग करते हैं, तब उन्हें अलग तरह की संतुष्टि प्राप्त होती है।

केंद्र और राज्यों के लोक सेवकों की मौजूदगी में अपने 45 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को अपने कनिष्ठों के ज्ञान का लाभ उठाने को कहा जो अलग-अलग पीढ़ी के हैं और संभवत: काम करने के बेहतर रास्ते जानते हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव के लिए सुधार के उनके मंत्र की लोक सेवकों द्वारा व्याख्या ‘प्रदर्शन के जरिये बदलाव के लिए सुधार’ के रूप में करनी चाहिए। मोदी ने कहा कि अगर लोक सेवक प्रदर्शन करने में सक्षम होते हैं तब जमीन पर बदलाव प्रत्यक्ष दिखेगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से अपने अनुभव और ज्ञान को कनिष्ठों के कौशल के साथ जोड़ने को कहा और जोर दिया कि कोई ऐसा काम नहीं है जो किया न जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि काम करते समय थकान नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे बाधाएं खड़ी होंगी। लोक सेवकों को ऊर्जावान रहने को जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘रुकावट समस्याएं पैदा नहीं करती, थकावट करती हैं।’ मोदी ने कहा कि जनभागीदारी सफलता का मूल है। कोई भी पहल तभी सफल होती हैं जब उसमें जनभागीदारी होती है। समाज को जोड़ना महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रधानमंत्री ने लोक सेवकों से कहा कि वे लोगों से बेहतर संपर्क बनाएं ताकि सरकार की योजनाओं एवं पहल को जमीन पर बेहतर ढंग से लागू किया जा सके। शासन के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रही पहलों पर नजर रखने के लिए बनाए गए सचिवों की समितियों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इन कार्यों के लिए अधिकारी स्वेच्छा से काम करते हैं और वह भी कार्यालय के समय के बाद और छुट्टियों के दिनों में। इन अधिकारियों की टीमों ने बंद दायरे को सफलतापूर्वक तोड़ा है और नए ताजे विचार और सुझाव पेश किए हैं। इन्होंने इस कार्य के लिए 10 हजार कामकाजी घंटे समर्पित किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमें ऐसा माहौल सृजित करने की जरूरत है जहां हर कोई योगदान दे सके। सवा सौ करोड़ देशवासी मिलकर राष्ट्र को आगे ले जाएंगे।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App