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मोदी-केजरीवाल सरकार में फिर ठनी, अटका सराय काले खां टर्मिनल का निर्माण

दरअसल इस प्रोजेक्ट के लिए दोनों सरकारें फंडिंग करेंगी। यही वजह है कि जब तक मतभेद नहीं सुलझा लिए जाते यह महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट अटका रहेगा।

Author November 25, 2018 1:41 PM
सराय कालेखां टर्मिनल को लेकर विवाद। (file pic)

कई मौको पर दिल्ली और केन्द्र सरकार आमने-सामने आ चुकी हैं। अब एक बार फिर विकास से जुड़े एक मुद्दे पर दोनों सरकारों में ठन गई है। यह मुद्दा है दिल्ली-मेरठ रुट पर बनने वाले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का। बता दें कि दिल्ली मेरठ रुट ट्रांजिट रेल सेवा का पहला फेज है। बाद में इस रेल सेवा को अलवर, पानीपत तक विस्तार दिया जाएगा। इसके लिए दिल्ली के सराय काले खां को मुख्य स्टेशन के रुप में डेवलेप किया जाएगा। RRTS के डिजाइन के अनुसार, सराय कालेखां स्टेशन पर इंटरचेंज स्टेशन बनाया जाएगा। जहां से आईएसबीटी, निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और निजामुद्दीन मेट्रो स्टेशन को भी RRTS स्टेशन के साथ जोड़ा जाएगा।

लेकिन केन्द्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच जिस बात पर विवाद है वो ये है कि केन्द्र सरकार इस स्टेशन को जमीन के ऊपर बनाना चाहती है, वहीं दिल्ली सरकार इस स्टेशन को अंडरग्राउंड बनाने की मांग कर रही है। यही वजह है कि इसी मतभेद के चलते दिल्ली सरकार ने अभी तक इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी है। दरअसल इस प्रोजेक्ट के लिए दोनों सरकारें फंडिंग करेंगी। यही वजह है कि जब तक मतभेद नहीं सुलझा लिए जाते यह महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट अटका रहेगा।

केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने बीते 26 अक्टूबर को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा था और इस पत्र में केन्द्रीय मंत्री ने जिक्र किया था कि सराय कालेखां पर अंडरग्राउंड स्टेशन बनाने से इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 4000 करोड़ रुपए बढ़ जाएगी। वहीं दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि सराय कालेखां स्टेशन को डेवलेप भी किया जाना है, लेकिन इस फैसले के चलते स्टेशन का डेवलेपमेंट वर्क भी अटक गया है। वहीं दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर कैलाश गहलोत से इस संबंध में अभी तक बात न हीं हो पायी है।

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