करीब 20 साल पुरानी है उद्धव और राणे की अदावत, शिवसेना में तय किया शाखा प्रमुख से सीएम तक का सफर, फिर बाल ठाकरे ने दिया निकाल

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और नारायण राणे के बीच अदावत कोई नई नहीं है। इन दोनों के बीच पिछले 20 सालों से राजनीतिक प्रतिद्वंदिता जारी है।

udhav thakre vs narayan rane
नई नहीं है उद्धव ठाकरे और नारायण राणे के बीच अदावत (फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव)

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे इन दिनों काफी चर्चा में हैं। वजह है उनका उद्धव ठाकरे पर दिया गया थप्पड़ वाला वो बयान, जिसके कारण वो गिरफ्तार तक हो चुके हैं।

नारायण राणे (Narayan Rane) ने आशीर्वाद यात्रा के दौरान कहा था- ‘‘यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि आजादी को कितने साल हो गए हैं। भाषण के दौरान वह पीछे मुड़कर इस बारे में पूछते नजर आए थे। अगर मैं वहां होता तो उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता।’’ राणे अपनी इस टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए और उन्हें शिवसेना के विरोध का सामना करना पड़ गया।

इस बयान के बाद महाराष्ट्र में फिर से उद्धव ठाकरे बनाम नारायण राणे की राजनीति शुरू हो गई है। हालांकि ये अदावत नई नहीं है। नारायण राणे जब शिवसेना में थी, तभी से उनके और उद्धव के बीच में अदावत चलती आ रही है।

पुरानी है अदावत

नारायण राणे ने अपनी राजनीति की शुरूआत शिवसेना में शाखा प्रमुख के रूप में शुरू किया था। 1999 में पहली बार शिवसेना-भाजपा सरकार बनी तो नारायण राणे को मंत्री पद मिला। इसी सरकार में बाद में वो मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। 2003 में, जब शिवसेना ने महाबलेश्वर में एक सम्मेलन में उद्धव ठाकरे को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नामित किया, तो राणे इसके विरोध में उठ खड़े हुए। इसके साथ ही उन्होंने उद्धव के नेतृत्व को चुनौती दे दी।

नारायण राणे पर इसके 2 साल बाद टिकट बेचने का आरोप लगा और तत्कालिन शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने 2005 में राणे को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके तुरंत बाद, राणे दर्जनों विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि, लगभग 40 विधायकों को अपने साथ लेकर, शिवसेना को तोड़ने का उनका प्रयास विफल हो गया।

राणे ने 2007 यह कहते हुए कांग्रेस छोड़ दी कि उन्हें मुख्यमंत्री पद का वादा किया गया था, पार्टी में कोई गुंजाइश नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बना डाली। 2019 में अपनी पार्टी को बीजेपी में विलय कराकर खुद भी भाजपा में शामिल हो गए। जहां वो कैबिनेट फेरबदल के बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री बनाए गए।

राणे को शिवसेना पर, खासकर ठाकरे परिवार पर तीखे हमले करने के लिए जाना जाता है। राणे जहां शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को अपना गुरु मानते हैं वहीं, उद्धव ठाकरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। हाल के वर्षों में, उन्होंने उद्धव की पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य पर भी कटाक्ष किया है।

थप्पड़ वाले बयान को शिवसेना ने ठाकरे के खिलाफ एक व्यक्तिगत हमले के रूप में देखा। जिसके बाद शिवसेना कार्यकर्ता राणे के खिलाफ सड़कों पर उतर गए। राणे के खिलाफ सोमवार को रायगढ़, पुणे और नासिक जिलों में कम से कम तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

हाल ही में, बाढ़ प्रभावित कोंकण क्षेत्र की अपनी यात्रा के दौरान, राणे ने राज्य में आपदाओं के लिए उद्धव ठाकरे के “दुर्भाग्य” को जिम्मेदार ठहराया था।

बीजेपी की रणनीति

राणे महाराष्ट्र के उन चार केंद्रीय मंत्रियों में से एक हैं जिन्हें पिछले महीने कैबिनेट विस्तार के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल किया गया था। राणे, भारती पवार, भागवत कराड और कपिल पाटिल सहित चारों को जनशिर्वाद यात्रा निकालने के लिए कहा गया है, जो 16 अगस्त से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में शुरू हुई थी।

मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के नगर निकायों सहित एक दर्जन से अधिक नगर निगमों में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं, इस यात्रा को भाजपा द्वारा शुरू किया गया एक प्रारंभिक प्रचार अभियान माना जा रहा है। राणे के सहारे बीजेपी बृहन्मुंबई नगर निगम से शिवसेना को सत्ता से हटाने की कोशिश में है।

राणे ने मुंबई में शिवाजी पार्क में बाल ठाकरे स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपनी जनशिर्वाद यात्रा शुरू करके शिवसेना पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि भाजपा अगले साल की शुरुआत में होने वाले मुंबई निकाय चुनाव में जीत हासिल करेगी। उन्होंने कहा, ‘भाजपा सत्ता में वापसी करेगी। हम बीएमसी में शिवसेना के तीन दशक के शासन का अंत सुनिश्चित करेंगे।

कितना होगा असर

शिवसेना और ठाकरे परिवार पर नारायण राणे के हमलों के भाजपा के लिए फायदे और नुकसान दोनों हैं। सूत्रों ने कहा कि यह कोंकण क्षेत्र जैसे बड़ी आबादी वाले इलाकों में अगले साल की शुरुआत में बीएमसी चुनावों में भाजपा को शिवसेना का मुकाबला करने में मदद करेगा।

हालांकि, शिवसेना नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ राणे की अभद्र भाषा भाजपा के लिए अच्छी नहीं होगी। “राज्य के लोगों ने देखा है कि कैसे उद्धव ठाकरे कोविड आपदाओं सहित अन्य संकट को धैर्य के साथ और भाजपा नेताओं की तरह बिना कोई शोर पैदा किए संभालते हैं। राज्य के लोग उद्धव ठाकरे को अपने परिवार के सदस्य के रूप में मानते हैं”।

शिवसेना नेता ने कहा कि विवादास्पद बयान देने के अलावा राणे का बीएमसी चुनावों में जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। “2015 में, राणे ने बांद्रा (पूर्व) विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा और शिवसेना से हार गए। हमने उन्हें उनकी जगह दिखा दी थी”।

बता दें कि विवादित बयान मामले में नारायण राणे को जमानत मिल गई है।

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