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देश की एकता व अखंडता सर्वोपरि: नायडू

देश की एकता और अखंडता को सर्वोपरि बताते हुए सरकार ने गुरुवार को कहा कि इससे किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है।

Author नई दिल्ली | August 5, 2016 4:01 AM

देश की एकता और अखंडता को सर्वोपरि बताते हुए सरकार ने गुरुवार को कहा कि इससे किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। राज्यसभा में गुरुवार को शून्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि देश की एकता और अखंडता पर किसी भी तरह का आघात बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। नायडू ने कहा कि शिक्षण संस्थान में अगर मुंबई हमलों के दोषी आतंकी याकूब मेमन और अलगाववादी मकबूल भट जैसे देश विरोधियों की बात की जाएगी तो हम कैसे चुप रहेंगे।

शिक्षण संस्थानों में क्यों हस्तक्षेप : भाकपा के डी राजा ने पुडुचेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संस्थान में असंतोष बढ़ता जा रहा है। सृजनात्मक गतिविधियों के लिए जाने जाने वाले इस संस्थान की परिषद की पत्रिका में हैदराबाद विवि में कथित आत्महत्या करने वाले छात्र रोहित वेमुला, तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर तथा गोविंद पानसरे के बारे में कुछ सामग्री प्रकाशित हुई। बाद में इसका विरोध हुआ और मीडिया की खबरों के अनुसार पत्रिका पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसी भी खबर है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने संस्थान से स्पष्टीकरण मांगा है। शिक्षण संस्थानों में इस तरह का हस्तक्षेप क्यों किया जा रहा है। राजा ने जेएनयू और हैदराबाद विश्वविद्यालयों का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ देशद्रोेह के मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
सरकार कैसे चुप रहे : केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि हैदराबाद विवि के छात्रसंघ अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है और उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप की बात भी कही है। अगर शिक्षण संस्थान में मुंबई हमलों के दोषी आतंकी याकूब मेमन और अलगाववादी मकबूल भट जैसे देश विरोधियों की बात की जाएगी तो हम कैसे चुप रहेंगे। उन्होंने कहा कि राजा को अपनी बात पुडुचेरी विश्वविद्यालय तक ही सीमित रखनी चाहिए थी।

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मैला ढोने की प्रथा : भाजपा के अमर शंकर सबले ने सिर पर मैला ढोने वालों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे लोग राजधानी में भी हैं और इस समस्या का हल तमाम दावों के बावजूद नहीं निकल पाया है। कर्मचारियों की समस्याएं : माकपा के सदस्य केके रागेश ने अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों का मुद्दा उठाया। भाजपा के सत्यनारायण जटिया ने खतरनाक उद्योगों और अस्वच्छ क्षेत्रों में काम करने वाले कामगारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे कर्मियों के प्रति अभी भी लोगों के मन में दुराव है जबकि ये कर्मी सम्मान के हकदार हैं। आज भी अस्पृश्यता का उन्मूलन नहीं हुआ है।

गोवा में अनुसूचित जनजाति : शून्यकाल में ही कांग्रेस के शांताराम लक्ष्मण ने गोवा में कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल न किए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल ही में चुनाव आयोग ने गोवा का दौरा किया तब उसे यह जानकारी मिली। आयोग से संबंधित विभाग ने एक माह में आंकड़े देने की बात कही थी लेकिन अब तक आंकड़े नहीं दिए गए हैं। वर्तमान रक्षा मंत्री (मनोहर पर्रिकर) जब राज्य के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने भी इस संबंध में प्रयास नहीं किए। तब सदन में मौजूद पर्रिकर ने कहा कि वर्ष 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान संविधान संशोधन कर उन तीनों समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया था जिनकी बात सदस्य कर रहे हैं।
पूर्वोत्तर में उड़ानें कम : माकपा सदस्य अहमद हसन ने अयर इंडिया की सहायक कंपनी अलायंस अयर की पूर्वोत्तर राज्यों में उड़ानें धीरे-धीरे कम होने का मुद्दा उठाया। ऐसी खबरें हैं कि मार्च अप्रैल 2017 तक पूर्वोत्तर क्षेत्र से अलायंस एयर पूरी तरह हट जाएगी। उन्होंने अलायंस एयर के प्रबंधन पर कोलकाता बेस में अवसंरचना संबंधी समस्त सुविधाएं होने के बावजूद इस बेस की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। माकपा के तपन कुमार सेन ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध करते हुए कहा कि अलायंस एयर के इस कदम से सेवा और रोजगार दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं तथा सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

ओड़ीशा में कृषि की केंद्रीय मदद लंबित : बीजद की सरोजिनी हेम्ब्रम ने ओड़ीशा में कृषि परियोजनाओं के लिए लंबित केंद्रीय मदद का मुद्दा उठाया। राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पांच फरवरी 2015 को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा था।

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