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चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन लगाया, नहीं लगा तो किया ये ट्वीट

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलगूदेशम पार्टी(टीडीपी) ने केंद्र सरकार से अलग होने का फैसला किया है। नायडू ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इसकी घोषणा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चंद्रबाबू नायडू( फाइल फोटो-पीटीआई)

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलगूदेशम पार्टी(टीडीपी) ने केंद्र सरकार से अलग होने का फैसला किया है। नायडू ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इसकी घोषणा की। हालांकि अभी उनकी पार्टी एनडीए से भी अलग होगी या नहीं, इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की है। चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पूरी न होने पर यह फैसला किया। उन्होंने इसके पीछे सूबे की जनता के हित की बात कही।प्रेस कांफ्रेंस से पहले ही चंद्रबाबू नायडू अपनेकेंद्र सरकार से अलग होने के फैसले की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना चाहते थे। यह उनके ट्वीट से जाहिर होता है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा,”मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने फैसले से अवगत कराना चाहता था। उनसे संपर्क करने की कोशिश किया। मगर वे उपलब्ध नहीं रहे।” इससे पहले भी नायडू ने दो ट्वीट किए। एक ट्वीट में जहां उन्होंने कहा-मैं किसी से नाराज नहीं हूं। यह फैसला आंध्र प्रदेश की जनता की भलाई के लिए लिया गया है। वहीं दूसरे ट्वीट में बोले-केंद्र लगातार एकतरफा फैसले कर रहा है।अब हमारा धैर्य टूट गया है। केंद्र सरकार से जुड़ने की मंशा पूरी नहीं हुई, इसलिए यह अलग होने का समय है।

नायडू की पार्टी टीडीपी के कुल 16 सांसद हैं। यह एनडीए सरकार में संख्याबल के लिहाज से तीसरी बड़ी पार्टी है। मोदी कैबिनेट में टीडीपी से दो मंत्री शामिल हैं। एक अशोक गजपति राजू और दूसरे वाईएस चौधरी। सरकार से पार्टी के अलग होने के एलान के बाद अब इन मंत्रियों के जल्द इस्तीफे देने की संभावना है। दरअसल आंध्र प्रदेश में सत्ता और विपक्ष दोनों सूबे को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने नायडू को इस बाबत भरोसा दिया था। मगर केंद्र सरकार के चाल साल पूरे होने के बाद भी मांग पूरी न होने पर नायडू ने सरकार से अलग होने का फैसला लिया।

नायडू के मुताबिक केंद्र सरकार ने विशेष राज्य का दर्जा देने से पैर खींच लिए, सिर्फ इतना कहा कि इसके समान ही आर्थिक सहायता और सब्सिडी की सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि बजट में भी कुछ खास लाभ आंध्र प्रदेश को नहीं हुआ। आम बजट पेश होने के बाद से लगातार आंध्र प्रदेश के सांसदों ने केंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। दरअसल जब आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य बन रहा था, तब बदले में आश्वासन दिया गया था कि राज्य की अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा। हालांकि अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। राज्य के बंटवारे के बाद से आंध्र प्रदेश को भारी राजस्व का नुकसान झेलना पड़ा है। केंद्र सरकार ने 2016 में आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज देने की घोषणा की थी, मगर नायडू सरकार ने फूटी कौड़ी न मिलने की बात कही।

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