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सिंहस्थ के बाद बदल जाता है मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री, मिथक है या संयोग

संयोग यह है कि सिंहस्थ के बाद हमेशा मुख्यमंत्री बदला जाता है। ये मिथक 62 साल से जारी है।

शिवराज सिंह चौहान, फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

2018 विधानसभा चुनाव नतीजों के साथ ही कई मिथक फिर से सुर्खियां बटोर रहे हैं। ऐसे ही प्रदेश में मुख्यमंत्री और प्रदेश की सत्ताधारी राजनीतिक दल से जुड़ा एक मिथक इस बार के विधानसभा चुनाव में नहीं टूटा। संयोग यह है कि सिंहस्थ के बाद हमेशा मुख्यमंत्री बदला जाता है। ये मिथक 62 साल से जारी है। वहीं दूसरा मिथक ये भी है कि उज्जैन में जब भी 12 साल के अंतराल में सिंहस्थ आता है तो प्रदेश में भाजपा की ही सरकार रहती है। अब प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में होंगे और उज्जैन में सिंहस्थ 2028 में होगा।

इन्होंने खो दी अपनी कुर्सी:

सिंहस्थ 1956: रविशंकर शुक्ला (1 नवंबर- 31 दिसंबर 1956)
अप्रैल-मई में सिहंस्थ हुआ। फिर 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश की स्थापना के साथ रविशंकर शुक्ल इसके पहले मुंख्यमंत्री बने। करीब दो महीने के लिए ही वो बागडोर संभाल पाए लेकिन 31 दिसंबर को उनका निधन हो गया।

सिंहस्थ 1968: गोविंद नारायण सिंह (30 जुलाई 1967- 12 मार्च 1969)
सिंहस्थ के दौरान गोविंद नारायण सिंह सीएम थे। सिंहस्थ के 11 महीने बाद 12 मार्च 1969 को उन्हें इंदिरा गांधी और नेहरू की कांग्रेस में उलझन के चलते अपना पद छोड़ना पड़ा।

सिंहस्थ 1980: सुंदरलाल पटवा (20 जनवरी 1980 से 17 फरवरी 1980)
मार्च- अप्रैल में सिंहस्थ हुआ, तब राष्ट्रपति शासन था।

सिंहस्थ 1992: सुंदरलाल पटवा (5 मार्च 1990 से 15 दिसंबर 1992)
अप्रैल-मई में सिंहस्थ हुआ। तब सुंदरलाल पटवा सीएम थे। सिंहस्थ के सात महीने बाद बाबरी मस्जिद ढहाने पर केन्द्र ने प्रदेश सरकार बर्खास्त कर दी, जिससे उनकी कुर्सी चली गई।

सिंहस्थ 2004: उमा भारती (8 दिसंबर 2003 से 23 अगस्त 2004 तक)
सीएम उमा भारती की अगुवाई में अप्रैल-मई में सिंहस्थ हुआ। लेकिन तीन महीने बाद ही अगस्त में उन्हें इस्ताफा देना पड़ा।

 

सिंहस्थ 2016: (29 नवंबर 2005 से 12 दिसंबर 2018)
अप्रैल- मई में शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में सिंहस्थ हुआ। जिसके करीब डेढ़ साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में शिवराज को हार मिली। बता दें शिवराज अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप चुके हैं।

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