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कश्मीर: मन में डर लेकर गए थे, दिल में प्यार लेकर लौटे

कश्मीर तो जन्नत है ही, यहां के लोगों के दिल में भी जन्नत है। वे हर समय मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। अनमोल ने बताया कि वहां के स्कूल हसीन वादियों के बीच बने हैं। ऐसे में शायद ही किसी का मन पढ़ाई से दूर भागे। उन्होंने कहा कि शायद ही कभी मैं इस यात्रा के अनुभवों को भूल पाऊं।
Author April 16, 2018 05:21 am
अजित के मुताबिक, इस बात में कोई शक नहीं है कि कश्मीर दुनिया का स्वर्ग है। उन्होंने बताया कि लोगों के मन में कश्मीर की जो छवि बनी हुई है, उससे कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश का नुकसान हो रहा है।

कश्मीर जाने के बारे में पता चलने पर पहले तो मैं काफी उत्साहित हुआ, लेकिन वहां के बारे में जो भी सुन रखा था, उसे याद करके मैं मायूस हो गया था। दोस्तों और घरवालों की सलाह पर मैं वहां गया और कश्मीर के बारे में मेरी सोच पूरी तरह से बदल गई। मैं अपने मन में डर लेकर गया था, लेकिन वहां से प्यार भरा दिल लेकर लाया हूं। ये बातें मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय की ‘मैत्री यात्रा’ पहल के तहत कश्मीर गए बारहवीं के छात्र अजित यादव ने कहीं। इसके तहत दिल्ली के 512 विद्यार्थी एक हफ्ते के लिए कश्मीर की यात्रा पर गए थे।

कौटिल्य सर्वोदय बाल विद्यालय, चिराग एंक्लेव में पढ़ने वाले अजित ने बताया कि समाचार चैनलों या अखबारों से हमें कश्मीर में होने वाली गोलीबारी और आतंकी हमलों के बारे में पता चलता रहता है। इससे हमारे दिमाग में वहां की छवि किसी युद्ध के मैदान जैसी बन गई है और इसी वजह से पहले मैं कश्मीर जाने का इच्छुक नहीं था, लेकिन वहां जाकर न सिर्फ मेरे मन से यह खौफ खत्म हुआ, बल्कि मुझे वहां के अच्छे और प्यारे लोगों से मिलने का मौका भी मिला। अजित के मुताबिक, इस बात में कोई शक नहीं है कि कश्मीर दुनिया का स्वर्ग है। उन्होंने बताया कि लोगों के मन में कश्मीर की जो छवि बनी हुई है, उससे कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश का नुकसान हो रहा है। वहां के लोग चाहते हैं उनकी यह छवि बदले और अधिक से अधिक संख्या में लोग यहां आएं।

इसी स्कूल की दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले अनमोल कुमार ने बताया कि उन्हें कश्मीर की यात्रा से दो बड़ी बातें सीखने को मिलीं। पहली, कश्मीर के लोगों जैसी मेहमाननवाजी शायद ही कोई कर सकता है। उन्होंने हमें हर वक्त सिर-आंखों पर बिठाए रखा। दूसरी, वहां घरों के सामने हमेशा गोलीबारी नहीं होती है और न ही हर मोड़ पर कोई आतंकी बैठा रहता है। कश्मीर तो जन्नत है ही, यहां के लोगों के दिल में भी जन्नत है। वे हर समय मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। अनमोल ने बताया कि वहां के स्कूल हसीन वादियों के बीच बने हैं। ऐसे में शायद ही किसी का मन पढ़ाई से दूर भागे। उन्होंने कहा कि शायद ही कभी मैं इस यात्रा के अनुभवों को भूल पाऊं। कक्षा 12 के छात्र धनेश वर्मा ने बताया कि वह पहली बार कश्मीर गए थे और वहां की वादियों, प्रकृति और पर्यावरण ने उनका मन मोह लिया।

उन्होंने बताया कि हमें कश्मीर को लेकर अपनी सोच बदलनी होगी और इस संबंध में अन्य लोगों को भी बताना होगा। धनेश का कहना है कि बारहवीं की परीक्षा देने के बाद अपने परिवार के साथ वह फिर से कश्मीर जाएंगे। ‘मैत्री यात्रा’ पर गए बच्चों ने वहां गुलमर्ग, डल झील, ट्यूलिप गार्डन व चश्मेशाही सहित विभिन्न स्थानों की सैर की। इतना ही नहीं, दिल्ली से गए विद्यार्थियों ने वहां कई दोस्त भी बनाए। इसी साल जनवरी में 500 कश्मीरी बच्चे दिल्ली भ्रमण पर आए थे।

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