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मुजफ्फरनगर दंगाः कोर्ट ने BJP के मंत्री, MLA समेत कई पर लगे केस वापस लेने की दी मंजूरी

वहीं, एक स्थानीय अदालत ने मुजफ्फरनगर जिले में 2013 के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान धार्मिक द्वेष बढ़ाने और अन्य अपराध करने के छह आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

Author लखनऊ/मुजफ्फरनगर | Updated: March 27, 2021 2:09 PM
Muzaffarnagar Riots, Shamli, BJP, UPयूपी के शामली जिला स्थित लाक गांव में मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के जले हुए घर। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः गजेंद्र यादव)

मुजफ्फरनगर की एक स्थानीय अदालत ने 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के मामले में उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश राणा, भाजपा विधायक संगीत सोम, पूर्व भाजपा सांसद भारतेंदु सिंह और विहिप नेता साध्वी प्राची समेत 12 भाजपा नेताओं के खिलाफ हिंसा भड़काने का मामला वापस लेने की अनुमति दे दी है।

विशेष न्यायालय के न्यायाधीश राम सुध सिंह ने सरकारी वकील को शुक्रवार को मामला वापस लेने की अनुमति दे दी। जिला सरकार के वकील राजीव शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने एवं लोक सेवक को कर्तव्य करने से रोकने के संबंध में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि इन लोगों ने एक महापंचायत में भाग लिया और अगस्त 2013 के आखिरी सप्ताह में अपने भाषणों के जरिए हिंसा भड़काई थी।

सरकारी वकील ने अदालत में याचिका दायर की थी कि उत्तर प्रदेश सरकार ने भाजपा नेताओं के खिलाफ अभियोग आगे नहीं बढ़ाने का जनहित में फैसला किया है और अदालत को इस मामले को वापस लेने की याचिका मंजूर करनी चाहिए। मुजफ्फरनगर और उसके पड़ोसी जिलों में 2013 में साम्प्रदायिक दंगों में कम से कम 62 लोगों की मौत हो गई थी और 50,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।

दंगों के दौरान धार्मिक शत्रुता बढ़ाने के 6 आरोपी बरीः एक स्थानीय अदालत ने मुजफ्फरनगर जिले में 2013 के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान धार्मिक द्वेष बढ़ाने और अन्य अपराध करने के छह आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। दंगों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उमेश, देवेंद्र, पिंटू, ललित कुमार, विनोद और अरविंद पर आईपीसी की धाराओं 153ए, 147, 392 और 436 के तहत मामले दर्ज किए थे। बचाव पक्ष के वकील चंद्र वीर सिंह ने बताया कि अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश निशांत देव ने सबूतों के अभाव में छह आरोपियों को बरी कर दिया।

दरअसल, एसआईटी ने दंगों के एक पीड़ित कसीमुद्दीन की शिकायत के आधार पर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि दंगाई आठ सितंबर, 2013 को जिले में शामली कोतवाली के सिंभल्का गांव में उसके घर में घुसे और लूटपाट के बाद वहां आग लगा दी। इन साम्प्रदायिक दंगों में 60 से अधिक लोग मारे गए थे और 40,000 लोग विस्थापित हुए थे।

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