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कर्नाटक: बहन की मौत पर कोई रिश्‍तेदार नहीं आया, आस-पास के मुस्लिमों ने करवाया अंतिम संस्‍कार

हिंदू युवक की 52 वर्षीय बहन की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार के लिए मुस्लिम युवकों ने मदद का हाथ बढ़ाया।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

कहते हैं कि जहां खून के रिश्ते भी दगा दे जाते हैं वहां प्यार और भाईचारा ही काम आता है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला कर्नाटक के मेंगलुरु में। यहां हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की शानदार मिसाल देखने को मिली। यहां हिंदू युवक की 52 वर्षीय बहन की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार के लिए मुस्लिम युवकों ने मदद का हाथ बढ़ाया। दरअसल हुआ ये कि यहां विद्यापुरा के पुट्टूर तालुक की रहने वाली भवानी की मौत हो गई। भवानी शादीशुदा नहीं थीं। उनके भाई कृष्णा ने रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों से बहन के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगी। शनिवार की दोपहर तक कृष्णा की मदद को कोई भी नहीं आया। उन्होंने रिश्तेदारों से फिर संपर्क किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

कृष्णा उदास हो गए उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। वह सोचने लगे कि अब वह अपनी बहन का अंतिम संस्कार कैसे करेंगे, तभी शौकत, हमजा, नजीर, रियाज और फार्रुख आए और उन्होंने कृष्णा को आश्वासन दिया। युवकों ने भवानी के अंतिम संस्कार के लिए चंदा जुटाना शुरू किया। आंगनबाड़ी शिक्षिका राजेश्वरी, साफिया और जुबैदा भी युवकों की अपील पर मदद करने आगे आईं।

तीनों ने भवानी के शव को नहलाकर अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया। उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। युवकों ने जो चंदा एकत्र किया उससे भवानी का क्रिया-कर्म हुआ। फार्रुख ने कहा कि उन लोगों ने पब्लिसिटी के लिए यह सब नहीं किया। उन लोगों को जब पता चला कि एक भाई अपनी बहन के अंतिम संस्कार के लिए परेशान है और उनके पास न तो रुपये हैं न ही लोग, तो उन लोगों ने कृष्णा की मदद करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि मृत व्यक्ति का जाति या धर्म नहीं होता है।

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