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केरल: गुरु पूर्णिमा पर मुस्लिम छात्रा ने पैर छूकर शिक्षक को किया प्रणाम, मुस्लिम संगठन ने जताया विरोध

एक फेसबुक पोस्ट में कांग्रेस विधायक ने कहा कि शिक्षकों द्वारा दिया जाने वाले ज्ञान कोई चैरिटी नहीं है बल्कि इसके बदले में उन्हें तनख्वाह दी जाती है। उन्होंने कहा, "एक अच्छे शिक्षक की सराहना करना गलत नहीं है, लेकिन पैर छूने की प्रथा और छात्रों को शिक्षकों के सामने झुकने की प्रथा पर सवाल उठाया जाना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा पर आयोजित उत्सव विवादों में आया। फोटो-Facebook/vtbalram

केरल के त्रिशूर में एक स्कूल में मनाया गया गुरु पूर्णिमा उत्सव विवादों में आ गया। त्रिशूर के सीएनएन गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों का सम्मान करने के लिए गुरु पूर्णिमा का उत्सव मनाया गया था। 27 जुलाई को हुए इस कार्यक्रम में कुछ मुस्लिम छात्राएं भी शिरकत की थीं। सोशल मीडिया पर वायरल एक फोटोग्राफ में कुछ मुस्लिम छात्राएं अपने शिक्षकों पर फूल चढ़ा रही हैं और उनके चरण स्पर्श कर रही है। इस पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है। टाइम्स नाव डॉटकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की यूथ विंग ने स्कूल के इस कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है। IUML ने इस बावत राज्य के शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है और जांच की मांग की है।

IUML राज्य के महासचिव पी के फिरोज ने कहा कि दूसरे धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों को एसी प्रथा मानने को मजबूर करना उनके व्यक्तिगत अधिकार का हनन है। पी के फिरोज ने कहा कि छात्राओं को एक धर्म विशेष की मान्यताओं को मानने पर मजबूर किया गया। कांग्रेस के विधायक वीटी बलराम ने भी इस कार्यक्रम की निंदा की है। उन्होंने स्कूल अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। एक फेसबुक पोस्ट में बलराम ने कहा कि शिक्षकों द्वारा दिया जाने वाले ज्ञान कोई चैरिटी नहीं है बल्कि इसके बदले में उन्हें तनख्वाह दी जाती है। उन्होंने कहा, “एक अच्छे शिक्षक की सराहना करना गलत नहीं है, लेकिन पैर छूने की प्रथा और छात्रों को शिक्षकों के सामने झुकने की प्रथा पर सवाल उठाया जाना चाहिए।

शमीर पीए नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने भी कहा कि स्कूल को दूसरे धर्मों को मानने वाले छात्राओं को हिन्दू धर्म के विधि-विधान करने को कहना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के तहत आने वाले शिक्षण संस्थानों को ऐसे क्रिया-कलापों से मुक्त रहना चाहिए। वहीं 100 साल पुराने इस स्कूल के मैनेजर ई बालागोपालन का कहना है कि छात्राओं को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मजबूर करने का आरोप गलत है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों पर कोई दबाव नहीं डाला गया था।

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