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Man Vs Wild Bear Grylls: मुंबई मेट्रो के लिए पेड़ों की कटाई पर छात्रों ने बीयर ग्रिल्स से मांगी मदद, कहा- ‘आ के पेड़ बचाओ’

ग्रिल्स को पत्र लिखने के बाद विद्यार्थियों को उनके जनसंपर्क कार्यालय से ऑटो जेनरेटेड ईमेल मिला है।

मुंबई | September 8, 2019 12:26 PM
पीएम मोदी और बेयर ग्रिल्स (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

प्रधान मंत्री मोदी के साथ शो करने वाले ब्रिटिश एडवेंचरर बेयर ग्रिल्स एक बार फिर चर्चा में आने वाले हैं। इस बार कोई शो के लिए नहीं बल्कि पेड़ बचाव अभियान को समर्थन देने के लिए उन्हें पत्र लिखा गया है। दरअसल मुंबई के एक कॉलेज के विद्यार्थियों ने ग्रिल्स को पत्र लिखकर मुंबई मेट्रो की खातिर आरे कॉलोनी में होने वाली पेड़ों की कटाई रोकने के लिए समर्थन मांगा है। बता दें कि मुंबई मेट्रो के कारशेड का मार्ग प्रशस्त करने के लिए आरे मिल्क कॉलोनी में करीब 2700 पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले का जबर्दस्त विरोध हो रहा है। इन पेड़ों को बचाने के लिए स्थानीय काश फाउंडेशन के साथ हाथ मिलाते हुए सेंट जेवियर कॉलेज के कुछ विद्यार्थियों ने बेयर ग्रिल्स को पत्र लिखकर उनसे ‘सेव आरे’ आंदोलन का समर्थन करने का अनुरोध किया है। बता दें कि ग्रिल्स परिवरण में काफी दिलचस्पी रखते हैं और ऐसे में अगर उनका समर्थन मिल जाता है तो उन पेड़ों की कटाई का विरोध एक नया मोड़ ले सकता है।

ग्रिल्स के माध्यम से संदेश पहुंचाना का इरादाः भारत में ब्रिटिश एडवेंचरर ग्रिल्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें इस अभियान में समर्थन करने को कहा गया है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में ग्रिल्स के ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ टीवी शो में नजर आए थे। ऐसे में विद्यार्थियों ने ग्रिल्स को पांच सितंबर को पत्र भेजकर कहा कि नागरिकों के विरोध के बावजूद सरकार सरकारी पर्यावरण अराजकता फैलाने पर तुली हुई है। इसके लिए उन्हें उन लोगों का समर्थन करना चाहिए जो इसका विरोध कर रहे हैं। बता दें कि उन पेड़ों के कटने का विरोध सभी कर रहें हैं। स्थानीय निवासी से लेकर संस्था तक लेकिन सरकार उनके विरोध को अंदेखा कर परिवरण को नुकसान पहुंचा रही है।

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विद्यार्थियों और संस्था को है ग्रिल्स के जवाब का इंतजारः बता दें कि ग्रिल्स को पत्र लिखने के बाद विद्यार्थियों को उनके जनसंपर्क कार्यालय से ऑटो जेनरेटेड ईमेल मिला है। इस मेल में कहा गया है कि ‘हमें मिलीं इतनी सारी जिज्ञासाओं के कारण हम और स्पष्टताओं को ध्यान में रखकर ही जवाब देंगे।’ इस बीच काश फाउंडेशन के अध्यक्ष और कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रमुख प्रो अवकाश जाधव ने कहा, ‘बेयर ग्रिल्स के जवाब से निश्चित ही इस मुद्दे पर संवेदनशीलता फैलेगी।’

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