महाराष्ट्र से एक दिल छू लेने वाली खबर सामने आयी है जहां एक बिछड़ी मां-बेटी का 12 साल बाद मिलन हुआ। सोमवार को क्षेत्रीय मानसिक अस्पताल में यह भावुक मिलन हुआ जब मनोरोग का इलाज करा रही एक महिला लगभग 12 साल के बाद अपनी सबसे बड़ी बेटी से मिली। नागपुर के क्षेत्रीय मानसिक अस्पताल में पुनर्वास कर रही यह महिला एक दशक से अधिक समय से अपने बच्चों से अलग थीं।

कविता (नाम बदला हुआ) को 20 फरवरी, 2024 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। औपचारिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद उनकी 23 वर्षीय बेटी की देखरेख में औपचारिक रूप से छुट्टी दे दी गई। इस अवसर पर मां और बेटी दोनों फूट-फूटकर रो पड़ीं। उपस्थित डॉक्टरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों ने भी इस पल को बेहद भावुक क्षण बताया।

कविता को सरकारी प्रियदर्शनी महिला छात्रावास में रखा गया

लगभग एक दशक पहले, कविता, उनके पति और चार बच्चे मुंबई के बांद्रा में एक पुल के नीचे बनी पाइपलाइन में घोर गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे। दुर्घटना में अपना एक पैर खो चुके उनके पति विकलांगता और शराब की लत से जूझ रहे थे और कभी-कभार मंदिर से दान लेकर और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते थे। चाइल्डलाइन और पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप से परिवार को 2014 में नागपुर लाया गया। बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश होने के बाद कविता को सरकारी प्रियदर्शनी महिला छात्रावास में रखा गया जबकि बच्चों को श्रद्धानंदपेठ के एक अनाथालय में भर्ती कराया गया।

महिला को मनोरोग के इलाज के लिए मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया

फरवरी 2024 में उन्हें मनोरोग संबंधी उपचार के लिए क्षेत्रीय मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ पंकज बागडे ने उनका इलाज किया और अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उनकी हालत धीरे-धीरे स्थिर हो गई। नियमित परामर्श सत्रों के माध्यम से, कविता ने ऐसी जानकारी साझा की जिससे अस्पताल की सामाजिक सेवा टीम को उसके परिवार का पता लगाने में मदद मिली। सामाजिक सेवा अधीक्षक कुंडा कटेखाये बिडकर ने खोज शुरू की और अंततः श्रद्धानंद अनाथालय के माध्यम से संपर्क स्थापित किया।

महिला के बच्चों के बारे में मिली जानकारी

बिडकर ने बताया, “अनाथालय से मिली जानकारी के अनुसार कविता की सबसे बड़ी बेटी ने अपनी पढ़ाई और ट्रेनिंग पूरी कर ली थी और वह मध्य प्रदेश के एक रिसॉर्ट में कार्यरत थीं। उनका एक बेटा, मुंबई के एक बाल गृह में आईटीआई का प्रशिक्षण ले रहा था जबकि दो छोटे बच्चों को विधिवत गोद लेने के लिए दे दिया गया था।” लगभग डेढ़ साल पहले, अस्पताल अधिकारियों ने कविता और उनके बेटे के बीच वीडियो कॉल की व्यवस्था की जो लगभग एक दशक बाद उनकी पहली बातचीत थी।

बेटी ने मां को साथ ले जाने की इच्छा जताई

बिडकर ने बताया, “कुछ महीने पहले बेटी खुद अस्पताल गई और मां को साथ ले जाने की इच्छा जताई। इसके बाद, बेटी जिस रिसॉर्ट में काम करती है उसके मैनेजमेंट से कविता की स्वास्थ्य स्थिति और पुनर्वास के बारे में चर्चा की गई। प्रबंधन ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और संकेत दिया कि वे कविता को रोजगार देने पर भी विचार करेंगे।” कविता और उसके बेटे के बीच मुलाकात की सुविधा के लिए, अस्पताल अधिकारियों ने बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष छाया गुरव के साथ समन्वय किया, जिन्होंने उनकी यात्रा की व्यवस्था की।

28 मार्च, 2024 को एमएचआरबी विजिटिंग बोर्ड ने कविता को पुनर्वास के लिए उपयुक्त घोषित किया। सोमवार को सभी सरकारी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद, वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ आशीष कुठे, समाज सेवा अधीक्षक कुंडा बिडकर की उपस्थिति में कविता को उनकी बेटी की देखरेख में सौंप दिया गया।

यह भी पढ़ें: 7.5 लाख रुपये कर्ज लेकर बुक की थी एयर एंबुलेंस

झारखंड के होटल कारोबारी को एयर एबुलेंस को दिल्ली ले जाया जा रहा था। उनके परिवार ने एयर एबुलेंस और दिल्ली के अस्पताल में इलाज के लिए लाखों रुपये उधार लिए थे। लेकिन एयर एबुलेंस हादसे का शिकार हो गई और सात लोगों की जान चली गई। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें