महाराष्ट्र में मराठी न जानने वाले ऑटो ड्राइवरों पर कार्रवाई हो रही है। कार्रवाई के विरोध में मुंबई के कांदिवली में ड्राइवरों ने सोमवार (24 अगस्त) को ‘रास्ता रोको’ प्रदर्शन किया। उनका दावा है कि नियम लागू होने के बाद से ड्राइवर कम्युनिटी के दूसरे लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं। गैर-मराठी ड्राइवरों ने लालजीपाड़ा के पास कांदिवली लिंक रोड पर सड़कें जाम कर दीं, जिससे सोमवार को ट्रैफिक रुक गया और भारी पुलिस तैनात करनी पड़ी। विरोध प्रदर्शन
यह विरोध सुबह करीब 9 बजे शुरू हुआ जब दर्जनों गैर-मराठी बोलने वाले लोग इस इलाके में इकट्ठा हुए। उनका आरोप था कि कुछ मूल मराठी बोलने वाले ऑटो ड्राइवर बाहर से आए, ड्राइवरों को रोक रहे थे और उन्हें भाषा सीखने की चेतावनी दे रहे थे।
‘मूल मराठी बोलने वाले हमें लगातार परेशान कर रहे हैं’
महाराष्ट्र में एक गैर-मराठी ड्राइवर सुनील यादव ने कहा, “मूल मराठी बोलने वाले हमें लगातार परेशान कर रहे और रोक रहे है और किसी भी तरह से भाषा सीखने के लिए कह रहे थे, जिससे हमें यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।”
ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के बीच फूट?
उत्तर प्रदेश के रहने वाले सुनील यादव ने दावा किया कि पूरे राज्य में मराठी लागू करने का कैंपेन, जिसे उन्होंने शांति से रहने वाला ऑटो-रिक्शा कम्युनिटी बताया, उसमें फूट डाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन लोगों को मराठी भाषा नहीं आती, उन पर 5,000 रुपये का फाइन लगाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि रोज़ लगभग 500 रुपये कमाने वाला ड्राइवर इतना बड़ा जुर्माना कैसे भर सकता है। ड्राइवरों का यह विरोध लगभग 1.5 घंटे तक चला।
20 अगस्त से पूरे महाराष्ट्र में RTO अधिकारियों ने उन लोगों को नोटिस देना शुरू कर दिया, जिन्होंने अभी तक भाषा नहीं सीखी है, और उन्हें एक महीने का समय दिया है। ऐसा न करने पर उनके लाइसेंस और पब्लिक सर्विस व्हीकल (PSV) बैज तीन महीने के लिए सस्पेंड किए जा सकते हैं। बार-बार नियम तोड़ने पर उनके लाइसेंस हमेशा के लिए सस्पेंड किए जा सकते हैं।
ड्राइवरों को रोज़ी-रोटी छिनने का डर
कैंपेन के पहले दो दिनों में, RTO अधिकारियों ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में लगभग 8,000 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों की मराठी जानने की जांच की और 1,326 ड्राइवरों को नोटिस दिए। मराठी न बोलने वालों पर कार्रवाई से रोज़ी-रोटी छिनने का डर भी फिर से बढ़ गया है। कई लोगों ने कहा कि उन्हें भाषा सीखने के लिए मराठी एजुकेशन सेंटर में जगह नहीं मिल पाई है।
इसलिए, ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी शिक्षण अभियान’ के तहत, सिर्फ़ 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट होल्डर्स ने प्रोग्राम पूरा किया, जबकि 17,000 से ज़्यादा अभी भी पूरा होने का इंतज़ार कर रहे थे। 15 अगस्त तक 7,750 को दोबारा एग्जाम देना पड़ा था।
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महाराष्ट्र सरकार की गैर-मराठी बोलने वाले ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों पर कार्रवाई शुक्रवार को दूसरा दिन भी जारी रही। इसका असर दिखा और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के कुछ हिस्सों में सड़कों पर कम कमर्शियल पैसेंजर गाड़ियां चलती दिखीं। कई ड्राइवरों ने नोटिस मिलने और अपने लाइसेंस और बैज सस्पेंड होने के डर से सड़कों से दूर रहने का फैसला किया। पढ़ें पूरी खबर
