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ड्राइवर ने बीच में रोकी ट्रेन, पटरी किनारे पेशाब की फिर आगे बढ़ाई गाड़ी

लोको पायलट अर्से से इंजन में टॉयलेट उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में अगर किसी ड्राइवर को शौच आदी के लिए जाना होता है तो उसे इसके लिए एक आपात संदेश भेजना होता है और फिर अगले बड़े स्टेशन पर वह शौचालय जा सकता है। पश्चिमी रेलवे का कहना है कि दुनियाभर में लोको इंजनों में शौचालय नहीं होते हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

मुंबई में नालासोपारा और वसई स्टेशन के बीच शनिवार (10 नवंबर) की सुबह एक रेल ड्राइवर पटरी किनारे पेशाब करते हुए वीडियो में कैद हो गया। टीओआई की खबर के मुताबिक वीडियो वसई में रहने वाले एक शख्स ने बनाया है। वीडियो के अनुसार दावा किया जा रहा है कि ड्राइवर ने पेशाब करने के लिए बीच में ट्रेन रोक दी और फारिग होकर गाड़ी आगे बढ़ाई। ट्रेन कौन सी थी इस बारे में जानकारी नहीं लग पाई है लेकिन यह एसी कोच वाली ट्रेन बताई जाती है। हालांकि, पश्चिमी रेलवे की तरफ से सफाई दी गई है कि जब असिस्टेंट लोको पायलट पेशाब के लिए नीचे उतरा उस वक्त ब्रेक पाइप में तकनीकि खराबी के कार ट्रेन रोकी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक लोको पायलट अर्से से इंजन में टॉयलेट उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में अगर किसी ड्राइवर को शौच आदी के लिए जाना होता है तो उसे इसके लिए एक आपात संदेश भेजना होता है और फिर अगले बड़े स्टेशन पर वह शौचालय जा सकता है। पश्चिमी रेलवे का कहना है कि दुनियाभर में लोको इंजनों में शौचालय नहीं होते हैं।

पश्चिमी रेलवे का यह भी कहना है कि लोको पायलट्स की ड्यूटी 6 घंटे से ज्यादा की नहीं होती है। पश्चिमी रेलवे के प्रवक्ता रविंद्र भास्कर ने मीडिया को बताया कि लोको पायलट्स के लिए काम करने के दौरान शौच आदी समस्या से निपटने के बारे में निर्देश बताए गए हैं। उनका कहना है कि ऐसा बहुत कम होता है कि लोको पायलट खुले में पेशाब करते हों। उन्होंने दावे के साथ कहा कि एक लोको पायलट रेलवे स्टेशनों के शौचालय का इस्तेमाल कर सकता है और अगर गाड़ी उसके निर्धारित समय से ज्यादा रोकी जाती है तो वह ऐसा कर सकता है लेकिन इसकी जानकारी उसके खाते में दर्ज होती है।

उन्होंने बताया कि ट्रेन रोके जाने और इसके कारणों को नियंत्रण कक्ष से नियंत्रित किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर ड्राइवर पटरी किनारे पेशाब करने के लिए इंजन से उतरता है तो इसका मतलब है कि वह कंट्रोल रूम को जानकारी देकर ऐसा करता है। इस दौरान यह ध्यान देना होता है कि सुरक्षा कारणों का उल्लंघन न हों, यानी ट्रेन को मिड-सेक्शन में रोका जाता जहां किसी दूसरी गाड़ी के आने का खतरा न हो।

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