हाईकोर्ट ने बीजेपी-शिवसेना पार्षदों के खिलाफ केस दर्ज करने का दिया निर्देश, कहा- भगवान नहीं हैं नेता - Mumbai High Court Directs to Register Case Against BJP-Shiv Sena Councilors, Said- Politicians are not God - Jansatta
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हाईकोर्ट ने बीजेपी-शिवसेना पार्षदों के खिलाफ केस दर्ज करने का दिया निर्देश, कहा- भगवान नहीं हैं नेता

बंबई उच्च न्यायालय ने मैंग्रोव पर अतिक्रमण करने वाले दो स्थानीय पार्षदों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश देते हुए कहा कि नेता ‘भगवान नहीं हैं’ और कानून से कोई ऊपर नहीं है।

Author मुंबई | February 22, 2018 6:08 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

बंबई उच्च न्यायालय ने मैंग्रोव पर अतिक्रमण करने वाले दो स्थानीय पार्षदों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश देते हुए कहा कि नेता ‘भगवान नहीं हैं’ और कानून से कोई ऊपर नहीं है। न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने मीरा रोड थाने को स्थानीय पार्षद भाजपा के परशुराम म्हात्रे और शिवसेना की अनीता पाटिल के खिलाफ एक हफ्ते के भीतर पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत नियम के उल्लंघन के लिए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘राजनीतिक नेता कानून से ऊपर नहीं हैं। वे भगवान नहीं हैं या कोई ऐसे व्यक्ति नहीं जिसे कानून के उल्लंघन का अधिकार नहीं मिल जाता है।। नगर निगम और स्थानीय पुलिस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से डर क्यों रही है? आपको निर्भीक होना चाहिए और किसी से नहीं डरना चाहिए।’’

सामाजिक कार्यकर्ता भरत मोकल ने अपने वकील डी एस म्हिसकर के जरिए जनहित याचिका दायर की थी। पीठ ने इसी पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका के मुताबिक म्हात्रे और पाटिल, दोनों ने अपने रिहाइशी बंगले और कार्यालय के निर्माण के लिए मैंग्रोव को कटवा दिया और अतिक्रमण किया। उल्लेखनीय है कि सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में पुलिस अधिकारियों को आरोप मुक्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर प्रतिदिन सुनवाई प्रारंभ करने के लगभग दो सप्ताह बाद बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि सीबीआई अदालत की पर्याप्त सहायता नहीं कर पा रही जिसकी वजह से एजेंसी के इस पूरे मामले को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है।

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे ने कहा कि सीबीआई आरोप मुक्त किए गए लोगों के खिलाफ सभी साक्ष्यों को रिकॉर्ड में रखने में विफल रही। न्यायमूर्ति ने कहा, “अभियोग लगाने वाली एजेंसी का यह प्रथम कर्तव्य है कि वह अदालत के समक्ष सभी साक्ष्यों को रखे। लेकिन इस मामले में अदालत द्वारा कई बार पूछने पर भी सीबीआई ने केवल उन्हीं दो अधिकारियों की भूमिका के बारे में बहस की जिन्हें आरोपमुक्त करने को उसने चुनौती दी है।” न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को लेकर अभी भी अस्पष्टता है क्योंकि मुझे सीबीआई की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिल रही।”

 

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