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मुंबई डांस बार : 2 लाख करोड़ सालाना का था यह ‘गंदा’ धंधा, रोक हटी तो शुरू हुई राजनीति

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई डांस बार पर 14 साल से लगी रोक कुछ शर्तों के साथ हटा दी है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीति शुरू हो चुकी है। सत्तारूढ़ बीजेपी इसे सुप्रीम कोर्ट का आदेश बताकर चुप है तो विपक्षी दल इस कदम को महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों का गठबंधन बता रही है।

Author January 18, 2019 8:57 AM
मुंबई डांस बार (प्रतीकात्मक चित्र) फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई डांस बार पर 14 साल से लगी रोक कुछ शर्तों के साथ हटा दी है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीति शुरू हो चुकी है। सत्तारूढ़ बीजेपी इसे सुप्रीम कोर्ट का आदेश बताकर चुप है तो विपक्षी दल इस कदम को महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों का गठबंधन बता रही है। मामला चाहें कुछ भी हो, लेकिन हकीकत यह है कि अकेला यह धंधा मुंबई को करीब 2 लाख करोड़ रुपए की वैध-अवैध आमदनी कराता था। सिर्फ वैध आमदनी की बात करें तो वह भी करीब 40 से 42 हजार करोड़ रुपए थी।

आर्थिक राजधानी को लगा था तगड़ा झटका : बता दें कि मुंबई डांस बार के खिलाफ सैकड़ों याचिकाएं आने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2005 में इन्हें बंद करने का फैसला सुनाया था। इस कदम के बाद मुंबई में लाखों लोग बेरोजगार हो गए थे। वजह यह थी कि डांस बार का धंधा कोई छोटा-मोटा व्यापार नहीं था, बल्कि यह दो लाख करोड़ रुपये की वैध-अवैध अर्थव्यवस्था थी। जानकारों के मुताबिक, अगस्त 2005 में डांस बार बंद हुए, तब इनका सालाना वैध कारोबार 40-42 हजार करोड़ रुपये का था। यह धंधा बंद होने से पिछले 15 साल में प्रदेश सरकार को कई लाख करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा हुआ है।

सिर्फ मुंबई पुलिस को मिलता था इतने करोड़ का हफ्ता : मुंबई की डांस बार संस्कृति पर लिखी गई किताब ‘बॉम्बे बार’ में जिक्र है कि डांस बार के व्यवसाय में शराब, डांसरों पर विभिन्न मदों में होने वाले खर्च और वेश्यावृत्ति से लेकर पुलिस को दिया जाने वाला हफ्ता शामिल था। इस धंधे से सिर्फ मुंबई पुलिस को ही करीब 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का हफ्ता मिलता था। वहीं, इस बिजनेस में उद्योगपतियों के साथ-साथ पुलिस और राजनेता भी शामिल थे।

राजनीतिक दांव था डांस बार बंद कराना : सूत्रों की मानें तो मुंबई के एक प्रमुख राजनीतिक दल के शीर्ष नेताओं की 5 डांस बार में हिस्सेदारी थी। कहा जाता है कि ये डांस बार ही इस दल की आय के सबसे बड़े माध्यम थे। वहीं, महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री आरआर पाटिल ने अपने प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दल को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए ही डांस बार पर प्रतिबंध का दांव खेला था।

राजनीतिक बयानबाजी शुरू : शिवसेना नेता अनिल परब के मुताबिक, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार नहीं रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी प्रावधान में संशोधन क्यों किए? ऐसे में डांस बार पर बैन के लिए तैयार विधेयक को फुलप्रूफ नहीं बनाना सरकार की विफलता है। वहीं, महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री रंजीत पाटिल का कहना है कि हम अदालत के निर्णय के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस निर्णय के दायरे में रहकर भी सरकार सतर्कता बरतेगी कि डांस बार के नाम पर किसी तरह की अवैध गतिविधि संचालित नहीं की जाएं।

एनसीपी ने किया घेराव : एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के पीछे महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों का गठबंधन है। जब हम सत्ता में लौटेंगे तो डांस बार पर दोबारा प्रतिबंध लगाया जाएगा।

2005 में डांस बार बंद हुए तो ऐसा था हाल : बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर अगस्त 2015 में डांस बार बंद कर दिए गए थे। उस वक्त मुंबई में 20-22 हजार डांस बार चलते थे, जिनमें 800 ही सरकारी आंकड़ों में रजिस्टर्ड थे। इनमें करीब 75 हजार डांसर काम करती थीं, जिनमें से 40 हजार ने अब दूसरा काम धंधा शुरू कर दिया है।

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