महाराष्ट्र सरकार की गैर-मराठी बोलने वाले ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों पर कार्रवाई शुक्रवार को दूसरा दिन भी जारी रही। इसका असर दिखा और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के कुछ हिस्सों में सड़कों पर कम कमर्शियल पैसेंजर गाड़ियां चलती दिखीं। कई ड्राइवरों ने नोटिस मिलने और अपने लाइसेंस और बैज सस्पेंड होने के डर से सड़कों से दूर रहने का फैसला किया।

ठाणे, सायन और कुर्ला के कुछ हिस्सों में ड्राइवरों ने कहा कि सख्ती की वजह से उनके कुछ साथियों ने एक दिन की छुट्टी ले ली है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले 58 साल के इजहार मोहम्मद ने कहा, “मेरे कई साथियों ने मराठी की बेसिक जानकारी न होने के कारण नोटिस मिलने के दबाव में शुक्रवार को अपनी टैक्सियां बंद करके घर पर रहने का फैसला किया।”

1,268 ड्राइवरों को मिला नोटिस

मोहम्मद उन 1,268 ड्राइवरों में से एक थे जिन्हें गुरुवार को राज्य में चेकिंग ड्राइव के पहले दिन मराठी की ठीक से जानकारी न होने के कारण नोटिस दिया गया था। पूरे महाराष्ट्र में पहले दिन 8,217 ड्राइवरों का टेस्ट किया गया, जिसमें MMR में 3,995 ड्राइवर शामिल थे। इनमें से 604 में ज़रूरी स्किल की कमी पाई गई। बाकी राज्य में 4,222 ड्राइवरों का टेस्ट किया गया और 664 को नोटिस जारी किए गए।

मोहम्मद ने कहा कि वह कई हफ़्तों से RTO या दूसरी लोकल भाषा की ट्रेनिंग जगहों पर मराठी ट्रेनिंग क्लास में एडमिशन लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने कहा, “अब मेरे पास प्राइवेट मराठी ट्यूशन लेने के अलावा कोई चारा नहीं है। मुझे नहीं पता कि इसमें कितना खर्च आएगा।”

RTO कर रही जांच

शुक्रवार को कार्रवाई जारी रखते हुए रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) ने कुर्ला, ठाणे, दादर और मुंबई सेंट्रल समेत कई इलाकों में कई फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए। ठाणे में ड्राइवरों की ‘मराठी की वर्किंग नॉलेज’ की ऑन-ग्राउंड जांच करने के लिए तीन-तीन अधिकारियों वाले चार फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए। लाइसेंस और पब्लिक सर्विस गाड़ी के बैज चेक करने के बाद अधिकारियों ने ड्राइवरों से उनके नाम और जन्म की जगह के बारे में बेसिक सवाल पूछे। इसके बाद मराठी में पैसेंजर एटीकेट, रूट, किराए और रोड सेफ्टी नॉर्म्स से जुड़े सवाल पूछे। यह टेस्ट फॉर्मल फ्लूएंसी के बजाय प्रैक्टिकल, रोज़ाना की बातचीत पर फोकस करता है।

ठाणे RTO चीफ हेमांगिनी पाटिल ने कहा, “मकसद ड्राइवरों को रोकना नहीं है, बल्कि बस यह वेरिफाई करना है कि क्या उन्हें बेसिक मराठी आती है जिसका इस्तेमाल पैसेंजर्स से अच्छे से बातचीत करने के लिए किया जा सके।” शुक्रवार को अधिकारियों ने चेकिंग जारी रखी, जबकि ठाणे में सड़कों पर चलने वाले ऑटो-रिक्शा और टोल नाका पार करने वालों की संख्या भी कम होने की खबर है क्योंकि ड्राइवर राज्य भर में चल रहे टेस्टिंग कैंपेन को लेकर सावधान थे।

बेसिक मराठी स्किल्स सीखने के लिए चलाया जा रहा अभियान

यह एनफोर्समेंट ड्राइव 30 सितंबर तक जारी रहेगी और इसमें कमर्शियल पैसेंजर गाड़ी के ड्राइवर शामिल हैं। जिन ड्राइवरों में जरूरी जानकारी नहीं पाई जाएगी, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उन्हें बेसिक मराठी स्किल्स सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जा रहा है। अगर वे अगली चेकिंग के दौरान सही जानकारी नहीं दिखा पाते हैं, तो उनके बैज तीन महीने के लिए सस्पेंड किए जा सकते हैं, और बार-बार नियम तोड़ने पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।

मोहम्मद की तरह दूसरे माइग्रेंट कमर्शियल पैसेंजर गाड़ी ड्राइवर अब भाषा सीखने के तरीके ढूंढ रहे हैं। चेंबूर के 59 साल के मनोज शाह ने मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद के ज़रिए ड्राइवरों के लिए उपलब्ध कराई गई 15-पॉइंट मराठी कोर्स बुकलेट खरीदी है। हफ़्तों की कोशिशों के बाद भी उन्हें क्लास में एडमिशन नहीं मिला। अब वह RTO के ऑन-रोड असेसमेंट से पहले रोज़ाना इन वाक्यों की प्रैक्टिस करते हैं। इस ड्राइव का असर कुछ मराठी बोलने वाले ड्राइवरों पर भी पड़ा है। एक महाराष्ट्रियन ऑटो ड्राइवर जो परमिट रिन्यूअल के लिए बोरीवली RTO गया था, उसे खबर है कि मराठी अच्छी तरह बोलने के बावजूद बाद में आने के लिए कहा गया।

ड्राइवर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मुझे बताया गया कि उनके (RTO अधिकारियों) पास परमिट रिन्यूअल के दौरान मराठी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए डिवाइस नहीं है और मुझे बाद में आने के लिए कहा गया।”

ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने लिया था फैसला

यह खास मामला राज्य के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाइक के उस फैसले के बाद आया है जिसमें उन्होंने गाड़ी के परमिट एप्लीकेशन और रिन्यूअल के दौरान मराठी में जानकारी का सर्टिफ़िकेट और बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग ज़रूरी कर दी है। महाराष्ट्र में अभी 9.65 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट हैं। यह पूरा एनफोर्समेंट कैंपेन राज्य के 105 दिन के ड्राइव के बाद आया है, जिसमें RTO और लैंग्वेज ट्रेनिंग सेंटर में चार, एक घंटे के सेशन के ज़रिए नॉन-मराठी बोलने वालों को बेसिक लैंग्वेज सिखाई जाती है, जिसकी डेडलाइन 15 अगस्त है।

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