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पश्चिम बंगाल असेंबली की पब्लिक अकाउंट कमेटी से मुकुल रॉय का इस्तीफा, दिया स्वास्थ्य कारणों का हवाला

भाजपा ने इस पद पर मुकुल रॉय की नियुक्ति का विरोध किया था। बीजेपी ने कहा था कि बंगाल विधानसभा की परंपरा के मुताबिक पीएसी का अध्यक्ष पद मुख्य विरोधी दल के विधायक को दिया जाता है, जबकि मुकुल भाजपा छोड़कर तृणमूल में शामिल हो चुके हैं।

Mukul Roy | Public Accounts Committee Chairman | West Bengal Assembly
मुकुल रॉय। ( फोटो सोर्स: ANI)।

बीजेपी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में लौटे मुकुल रॉय ने स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा से लोक लेखा समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। रॉय ने अपना इस्तीफा विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी को ईमेल पर भेजा है।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा स्पीकर अध्यक्ष बिमान बनर्जी को सौंपे गए एक पत्र में, रॉय ने कहा, “मैं आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि आप अध्यक्ष के पद से और लोक लेखा समिति (पीएसी), पश्चिम बंगाल के सदस्य के रूप में मेरा इस्तीफा स्वीकार करें, क्योंकि मैं स्वास्थ्य कारणों की वजह से अपने पद का निर्वहन करने में असमर्थ हूं।

रॉय ने आगे कहा, “लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं कामना करता हूं कि आपके कुशल नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विधान सभा का अच्छा कार्य जारी रहेगा।

शुक्रवार ( 24 जून, 2022) को ही विधानसभा के मानसून सत्र की समाप्ति पर स्पीकर ने उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया था। भाजपा ने इस पद पर मुकुल रॉय की नियुक्ति का विरोध करते हुए कहा था कि बंगाल विधानसभा की परंपरा के मुताबिक पीएसी का अध्यक्ष पद मुख्य विरोधी दल के विधायक को दिया जाता है। विपक्षी भाजपा चाहती थी कि उसके विधायक अशोक लाहिड़ी समिति का नेतृत्व करें। जबकि मुकुल भाजपा छोड़कर तृणमूल में शामिल हो चुके हैं।

नदिया जिले के कृष्णानगर उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर 2021 का विधानसभा चुनाव जीतने वाले रॉय एक महीने बाद जून 2021 में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि, ऐसा करने के बावजूद उन्होंने विधायक के अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। भाजपा ने दलबदल विरोधी कानून के तहत स्पीकर से मुकुल की विस सदस्यता खारिज करने का भी अनुरोध किया था।

मामला कलकत्ता हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था। अदालत ने स्पीकर से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था। स्पीकर दूसरी बार भी अपने पहले वाले फैसले पर कायम रहे। उन्होंने कहा कि मुकुल के पार्टी बदलने का कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया है।

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