UCC in MP: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने और इसके लिए मसौदा तैयार करने के लिए एक 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। राजधानी भोपाल से विधि और विधायी कार्य विभाग ने एक आदेश जारी कर 27 अप्रैल को यूसीसी के संबंध में जानकारी शेयर की है। सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों से यूसीसी के लिए ड्राफ्ट तैयार करने कहो कहा है।
राज्य सरकार का उद्देश्य इस साल दिवाली तक UCC को लागू करने का है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि उत्तराखंड और गुजरात ने UCC को लागू किया था और अब मध्य प्रदेश में भी इसे लागू करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना प्रसाद देसाई करेंगे। इसके सदस्यों में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और समाज सेवी बुधपाल सिंह शामिल हैं।
समिति को दिया गया समीक्षा और ड्राफ्ट बनाने का टास्क
विधायी कार्य विभाग के आदेश में कहा गया है कि विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामले वर्तमान में अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों द्वारा शासित हैं। इसमें कहा गया है कि इन ढांचों की समीक्षा करने और नागरिकों के बीच समानता, निष्पक्षता और कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी संरचना विकसित करने की आवश्यकता है।
सरकार द्वारा जारी इस निर्देश के अनुसार पैनल राज्य के मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों का व्यापक अध्ययन करेगा, जिसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। यह पैनल अन्य राज्यों, विशेष रूप से उत्तराखंड और गुजरात द्वारा अपनाए गए मॉडलों की भी जांच करेगा ताकि प्रासंगिक प्रथाओं की पहचान की जा सके।
आम जनता से परामर्श लेगी कमेटी
समिति को राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए, एक समान नागरिक संहिता के लिए संतुलित और व्यावहारिक कानूनी ढांचा प्रस्तावित करने का कार्य सौंपा गया है। यह समिति आम जनता, सामाजिक और धार्मिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों सहित हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करेगी और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक परामर्श भी आयोजित कर सकती है।
यह पैनल विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के प्रावधानों की जांच करेगा और लिव-इन रिलेशनशिप के नियमन, पंजीकरण और कानूनी निहितार्थों के संबंध में उपाय सुझाएगा। यह भविष्य में होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए प्रस्तावित किसी भी कानून के कानूनी, प्रशासनिक और कार्यान्वयन पहलुओं की समीक्षा करेगा। समिति को 60 दिनों के भीतर राज्य सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट के साथ विधेयक का मसौदा प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। समिति के कामकाज, सेवा शर्तों और अन्य परिचालन पहलुओं के संबंध में अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
सीएम मोहन यादव ने 2023 के अंत में पदभार संभाला और मजबूत बहुमत वाली बीजेपी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, के लिए यूसीसी का यह कदम अब तक के उनके कार्यकाल के सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत कदमों में से एक है। इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध हो रहा है, खासकर आदिवासी समूहों और विपक्षी दलों की ओर से। मध्य प्रदेश की 21 प्रतिशत से अधिक आबादी अनुसूचित जनजातियों से संबंधित होने के कारण, यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है।
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