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मध्यप्रदेश: धर्मांतरण के आरोप में एक ईसाई पादरी सहित तीन गिरफ्तार

प्रशांत गुप्ता ने पुलिस को शिकायत में कहा कि पादरी ने मुझे और मेरे साथियों को नौकरी देने का कहकर प्रभु इशु की शरण में आने के लिए बाध्य किया तथा मेरा धर्म परिवर्तित कर दिया।
Author सतना (मप्र) | May 23, 2016 05:35 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

पुलिस ने एक ईसाई पादरी और उसकी दो महिला सहयोगियों को तीन हिन्दुओं के धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया है। पादरी और उसकी दो महिला सहयोगियों ने गोरइया गांव के निवासी प्रशांत गुप्ता (25) और उसके दो साथियों रामबन आदिवासी और हेमराज वर्मा को जिले के कोटर थाना क्षेत्र में स्थित अबेर चर्च में बुलाया था। गुप्ता ने पुलिस को की गई अपनी शिकायत में कहा, ‘मैं कुछ समय पहले से पादरी ए बी एंथनी के संपर्क में था। उन्होंने मुझे और मेरे साथियों को नौकरी देने का कहकर प्रभु इशु की शरण में आने के लिए बाध्य किया तथा मेरा धर्म परिवर्तित कर दिया।’

उसने कहा, ‘शनिवार (21 मई) को हम तीनों को उधवधाम मंदिर के पास की नदी में ले जाकर डुबकी लगवाई गई और फादर एंथनी ने मुझे बताया कि अब तुम ईसाई धर्म के हो चुके हो तथा रविवार (22 मई) को प्रात: मुझे प्रार्थना की लिए बुलाया और समझाने लगे के आगे चलकर देश में ईसाइयत का राज होगा और ईसाई धर्म का ध्वज यहां लहराया जाएगा।’ उसने बताया कि इसके बाद उसने साथियों को फोन कर वहां बुलाया और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने एंथनी सहित दो महिलाओं प्रवीण चौधरी व प्रभा एंथनी को गिरफ्तार कर लिया।’

कोटर थाना प्रभारी महेन्द्र जगत ने बताया कि तीनों आरोपियों को धर्मांतरण एवं धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 295 (अ) और धारा 3:4 के तहत गिरफ्तार किया गया है। तीनों आरोपियों को रविवार (22 मई) को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उनकी जमानत नामंजूर करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य लक्ष्मी यादव ने कहा, ‘क्षेत्र में धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ रही हैं, पुलिस को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।’

हाल ही में पुलिस और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जिले के कोगांव क्षेत्र के एक चर्च में घुसकर एक हिन्दू नाबालिग लड़की और ईसाई लड़के की शादी रुकवाई थी जिस पर चार साल पूर्व ईसाई धर्म अपनाने का आरोप था। पुलिस ने यह कार्रवाई यादव और बजरंग दल की शिकायत पर की थी। पुलिस ने कहा कि इस जोड़े ने दावा किया कि उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है लेकिन कानून के अनुसार इसकी सूचना पुलिस को नहीं दे सके, जो कि धर्मांतरण कानून के अनुसार अनिवार्य है। शादी के वक्त लड़की की उम्र 18 साल से 10 दिन कम थी। इस आधार पर पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों ने विवाह रुकवाया।

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