Jabalpur Cruise Tragedy: जबलपुर में नर्मदा नदीं में हुए क्रूज हादसे में रविवार सुबह बरगी बांध के पानी में तीन दिन तक चला रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन खत्म हो गया, और दो शव निकाले गए। इसके साथ ही मरने वालों की संख्या 13 तक पहुंच गई। आखिरी में निकाले गए दो शवों में एक 9 वर्षीय बच्चा मयूरम और उसके चाचा कामराज शामिल थे, जो जबलपुर स्थित आयुध कारखाने में कर्मचारी थे।
कामराज पिछले एक साल से जबलपुर के आयुध कारखाने में कार्यरत थे, और अपने परिवार को तिरुची से जबलपुर बुला लिया था। उनकी पत्नी करकुझली सोच रहीं थीं कि स्कूल की छुट्टियां परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा मौका है। उनके रिश्तेदार गर्मियों की छुट्टियों के लिए तमिलनाडु से आए थे; उनमें मयूरम और उनका भाई इनिया भी शामिल थे।
परिवार में बचा केवल एक बच्चा
गुरुवार को कामराज ने छुट्टी ली। वे सुबह जल्दी निकल गए, पहले भेड़ाघाट गए, जहां बच्चों ने संगमरमर की घाटी के ऊपर रोपवे की सवारी की, और फिर बांध रिसॉर्ट के लिए रवाना हुए, जहां वे दोपहर तक पहुँच गए। शाम तक वे पानी में ही थे। इस हादसे के बाद इनिया को बचा लिया गया, लेकिन मयूरम का कोई पता नहीं चल सका। कामराज के छोटे बेटे, तमिलवेंथन की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और उनके शव को तमिलनाडु वापस भेज दिया गया था। बच्चे की मां, करकुझली की भी इस दुर्घटना में मौत हो गई।
कामराज परिवार का इकलौते जीवित सदस्य दस साल के लड़के पुविथारन ने उस हादसे को याद करते हुए बताता है कि नाव सुचारू रूप से चल रही थी। ऊपरी डेक पर कहीं, यात्रियों का एक समूह जन्मदिन मना रहा था। उसने बताया, “मौसम एकदम साफ था। शुरुआत में कोई दिक्कत नहीं थी। अचानक हवा बहुत तेज हो गई। लहरें जोर से टकराने लगीं।
दादी के साथ तमिलनाडु लौटा बच्चा
19 साल के लड़के ने बताया कि उनके परिवार में सिर्फ बच्चों को ही जहाज पर चढ़ने से पहले लाइफ जैकेट दी गई थीं। जब जहाज का बहाव खतरनाक हो गया तो बड़े लोग भी उन्हें लेने के लिए आगे बढ़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नाव पलटने से लड़का उबड़-खाबड़ पानी में जा गिरा। किनारे पर मौजूद स्थानीय कर्मचारियों ने उसे देखा। उसने बताया, “मैंने अपना हाथ उठाया और एक चाचा ने मेरी तरफ रस्सी फेंकी जिसे मैंने पकड़ लिया।” बचाए जाने के बाद लड़का अपनी दादी के साथ तमिलनाडु लौट गया जबकि उसके रिश्तेदारों को ताबूतों में हवाई जहाज से लाया गया।
सर्च ऑपरेशन में लगी खूब मशक्कत
पिछले दो दिनों में सर्च ऑपरेशन का दायरा लगातार बढ़ाया गया था। गोताखोर सतह से 40 से 50 फीट नीचे काम कर रहे थे और लगभग पांच किलोमीटर के दायरे की छानबीन कर रहे थे। आगरा से हवाई मार्ग से लाए गए सेना के गोताखोरों, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों और स्थानीय बचाव कर्मियों सहित 200 से अधिक कर्मियों ने बारी-बारी से काम किया, गाद से भरे पानी और कम दृश्यता में भी बचाव कार्य जारी रखा, जिसके बाद अंततः अवशेष बरामद किए गए।
जबलपुर के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया, “हमने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में बचे हुए दो शव बरामद कर लिए हैं। यह बांध एक विशाल क्षेत्र में स्थित है जिसका उपयोग सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए किया जाता है। गोताखोर एक बार में केवल 15 मिनट के लिए ही डूबे हुए शवों की तलाश कर सके। दृश्यता बहुत कम थी। सभी ने जीवित बचे लोगों का पता लगाने की पूरी कोशिश की।”
सभी यात्रियों की हुई पहचान
राघवेंद्र सिंह ने बताया कि क्रूज जहाज की शेल्फ लाइव 50 वर्ष थी और उसने 20 वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी। उन्होंने कहा कि हर दो महीने में जहाज की फिटनेस जांच की जाती थी और पिछली जांच में जहाज फिटनेस टेस्ट में पास हो गया था। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना का कारण भयंकर तूफान था, जिसने आसपास के पेड़ों को भी उखाड़ दिया। जांचकर्ताओं का कहना है कि जहाज पर सवार सभी 41 पहचाने गए यात्रियों का पता चल गया है, 28 को बचा लिया गया है, 13 की मौत हो गई है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया। एमपी टूरिज्म का पर्यटकों से भरा क्रूज तूफान के बीच डूब गया। शनिवार को दो और बच्चों के शव बरामद किए गए हैं। इससे अब तक हादसे में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है। पढ़िए पूरी खबर…
