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देसी ठेके पर ‘अंग्रेजी’ बेचना चाहती थी कमलनाथ सरकार! फंस गया पेच

मध्य प्रदेश सरकार की योजना थी कि अगर वर्तमान व्यवस्था से उम्मीद के मुताबिक राजस्व नहीं आता तो देसी शराब की दुकानों पर इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) की बिक्री की इजाजत दी जाए।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार देशी शराब की दुकान पर अंग्रेजी शराब बेचना चाहती है। (प्रतीकात्मक फोटो)

मध्य प्रदेश सरकार की योजना थी कि अगर वर्तमान व्यवस्था से उम्मीद के मुताबिक राजस्व नहीं आता तो देसी शराब की दुकानों पर इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) की बिक्री की इजाजत दी जाए। हालांकि, राज्य सरकार की यहय योजना मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के लागू होने से खटाई में पड़ते नजर आ रही है। बता दें कि नई सालाना एक्साइज पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू होगी। पिछले साल जारी हुए लाइसेंस की अवधि 31 मार्च को खत्म हो जाएगी। हालांकि, कैबिनेट ने चुनावी आचार संहित के लागू होने के पहले ही इस बात की इजाजत दे थी, लेकिन इस नीति को लागू करने से पहले चुनाव आयोग की इजाजत लेनी होगी, क्योंकि इसमें दुकानों की नीलामी भी शामिल है। हर नीलामी के लिए चुनाव आयोग की इजाजत लेनी होगी।

बीजेपी ने शराब को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए राज्य सरकार से कहा है कि वह इस प्रावधान को वापस ले। पार्टी का मानना है कि इससे ग्रामीण इलाकों के युवाओं पर बेहद खराब असर पड़ेगा। सीएम कमलनाथ को लिखी एक चिट्ठी में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘राज्य के भविष्य के हित में खुद को राजनीतिक दबावों से मुक्त करते हुए कृपया इस फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लें।’ उधर, आदर्श आचार संहिता के बुकलेट आवंटित होने के तुरंत बाद राज्य सरकार इजाजत लेने के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी के पास पहुंची। चुनाव अधिकारी ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को चुनाव आयोग के पास भेजा है। आयोग ने पूछा है कि क्या यह पॉलिसी पिछले साल से अलग है? उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इसका जवाब भेजेगी।

चीफ इलेक्शन ऑफिसर वी कांता राव ने कहा कि सरकार के जवाब से संतुष्ट होने के बाद चुनाव आयोग या तो इस पॉलिसी को लागू करने के लिए कहेगा या फिर ऐसे दुकानों को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने तक चलने देने के लिए कहेगा। बता दें कि राज्य सरकार की इस पॉलिसी के तहत वर्तमान लाइसेंसधारी 20 प्रतिशत अधिक शुल्क चुकाकर अपना लाइसेंस रिन्यू करा सकते हैं। अगर वे इनकार करते हैं तो नीलामी प्रक्रिया का सहारा लिया जाएगा। हालांकि, अगर उम्मीद के मुताबिक राजस्व 70 फीसदी से कम आता है तो आबकारी की दुकानों की दोबारा नीलामी होगी और देसी शराब बेचने वाले दुकानों को IMFL बेचने की इजाजत मिलेगी। बता दें कि राज्य में करीब 2700 देसी शराब की दुकानें जबकि 1,000 आईएमएफल बेचने वाली शॉप्स हैं।

कांग्रेस का कहना है कि यह प्रावधान पिछली पॉलिसी का ही हिस्सा है, लेकिन बीजेपी इससे सहमत नहीं है। चौहान ने कहा, ‘तत्कालीन बीजेपी सरकार ने यह फैसला किया था कि एक भी नई दुकान नहीं खुलने दी जाएगी और जागरूकता फैलाने के साथ धीरे-धीरे शराबबंदी के रास्ते पर आगे बढ़ा जाएगा। हमें लगता था कि आप हमारी नीति को जारी रखेंगे। आपके फैसले का लोगों की सेहत, युवाओं के भविष्य और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ेगा।’ वहीं, सीएम के मीडिया कॉर्डिनेटर नरेंद्र सलूजा ने चौहान को निशाने पर लेते हुए दावा किया कि पूर्व सीएम के निशाने पर सिर्फ अंग्रेजी शराब की बिक्री है। सलूजा का आरोप है कि शिवराज सिर्फ देसी शराब को बढ़ावा देते हैं। उनके मुताबिक, शिवराज ने तो देसी शराब निर्माताओं के लिए 2019-2020 तक टेंडर अप्रूव कर दिए। सलूजा ने यह भी आरोप लगाया कि शिवराज ने तीन नए निर्माताओं को टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने की इजाजत नहीं दी ताकि उनके मनपसंद निर्माताओं का एकाधिकार बना रहे।

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