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ये है हिंदुस्तान! पितृपक्ष के दौरान हिंदू शख्स ने मुस्लिम दोस्त के लिए किया ‘तर्पण’, करते हैं प्रार्थना- अगले जन्म में फिर बनें दोस्त

राम नरेश ने बताया कि हर दिन वो अपने पूर्वजों और अली की तस्वीरों की सामने विशेष प्रार्थना करते हैं।

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तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (पीटीआई फोटो)

दोस्ती में धर्म, जात या रंग मायने नहीं रखता… इस बात को एक बार फिर चरितार्थ किया है मध्य प्रदेश के पंडित राम नरेश दुबे ने। सागर जिला निवासी राम नरेश ने बताया कि दुनियाभर में हिंदू पितृपक्ष पखवाड़े के दौरान अनुष्ठान और विशेष प्रार्थना के जरिए अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। ऐसे में उन्होंने लंबे समय तक अपने मित्र रहे सैय्यद वाहिद अली के निधन के बाद उनके लिए भी इसी तरह रस्में निभाईं। वाहिद की करीब तीन साल पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

उन्होंने बताया, ‘वाहिद अली बचपन से मेरे सबसे अच्छे दोस्त रहे हैं। पेशे से वो एक वकील थे जो सागर जिले में गोपालगंज में प्रेक्टिस कर रहे थे। तीन साल पहले एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। जैसे में पितृपक्ष के पखवाड़े में अपने पूर्वजों का तर्पण करता हूं ठीक वैसे ही अपने सबसे अच्छे दोस्त वाहिद के लिए तर्पण किया। प्रार्थना की कि भगवान उसकी आत्मा को शांति दे। अगले जन्म में हम फिर से दोस्त बनें।’

जिले के सुरखी क्षेत्र में चतुर्भट गांव के निवासी राम नरेश ने बताया कि हर दिन वो अपने पूर्वजों और अली की तस्वीरों की सामने विशेष प्रार्थना करते हैं। बता दें कि तर्पण दक्षिण की ओर मुंह करके किया जाता है और पूर्वजों को उनके नाम के साथ जल, दूध और काले तिल चढ़ाकर याद किया जाता है।

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सैय्यद वाहिद के पुत्र वाजिद अली बताते हैं, ‘मेरे पिता की नवंबर, 2017 में मौत हो गई थी। तीन साल बाद भी ना सिर्फ पिता के दोस्त राम नरेश घर आते-जाते रहे हैं बल्कि उनकी याद में विशेष प्रार्थना करते हैं। ये हमारे देश और गंगा जमुनी तहजीब के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने का सबसे अच्छा उदाहरण है।’

इधर दुबे के लिए तर्पण अनुष्ठान करने वाली पुजारी ने बताया, ‘मैंने दोस्ती का ऐसा गहरा बंधन कभी नहीं देखा, जिसे मौत भी तोड़ ना सकी।’ बता दें कि दुबे का गांव जिस क्षेत्र में स्थित है वो मध्य प्रदेश की उन 27 विधानसभा सीटों में एक हैं जहां कुछ सप्ताह बाद उपचुनाव होने हैं।

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