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रोजगार और बेहतर यातायात का जरिया बनने को तैयार मोटरसाइकिल टैक्सी

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कार की तरह ओला और उबर कंपनियों की मोटरसाइकिल टैक्सियां हैं। मोटरसाइकिल टैक्सियों को भी मोबाइल मंगाया जा सकता है। ओला, उबर ऐप के जरिए किसी भी जगह चंद मिनट में मोटरसाइकिल टैक्सी लेकर चालक पहुंचते हैं।

Author March 5, 2018 05:21 am
ओला कंपनी से जुड़कर मोटरसाइकिल टैक्सी चलाने वाले 12वीं पास चंदन श्रीवास्तव ने बताया कि अधिकांश बुकिंग नोएडा और ग्रेटर नोएडा की मिलती हैं।(Photo source: Twitter)

पीली पट्टी वाली मोटरसाइकिल यानी बाइक टैक्सी महानगरों में आने वाले दिनों स्व रोजगार और सस्ते यातायात का बेहतरीन माध्यम साबित होने जा रही है। भीड़भाड़ भरी सड़कों के बीच जल्द गंतव्य तक पहुंचाने वाली दुपहिया टैक्सियों की मांग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। युवाओं के लिए करीब 40-50 हजार रुपए प्रति महीने के रोजगार का साधन बनने के अलावा मुसाफिरों के लिए कम कीमत पर जल्द पहुंचाने का विकल्प दे रही है। कुछ ही महीनों में नोएडा और गाजियाबाद में मोटरसाइकिल टैक्सियों की संख्या 500-600 तक पहुंच गई है। जो लगातार हर महीने बढ़ रही है। जानकारों का मानना है कि देश के महानगरों की सड़कों पर लगातार बढ़ती भीड़ के बीच मोटर साइकिल टैक्सियां करीब 10 लाख लोगों के लिए स्व रोजगार का द्वार खोल सकती हैं। अकेले और शहर में कम दूरी तक जाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। जिनके पास अभी तक केवल कार टैक्सी, बस, रिक्शा, ऑटो या ई रिक्शा के विकल्प थे, उनके लिए ये मोटरसाइकिल टैक्सी सबसे ज्यादा मुफीद हैं।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कार की तरह ओला और उबर कंपनियों की मोटरसाइकिल टैक्सियां हैं। मोटरसाइकिल टैक्सियों को भी मोबाइल मंगाया जा सकता है। ओला, उबर ऐप के जरिए किसी भी जगह चंद मिनट में मोटरसाइकिल टैक्सी लेकर चालक पहुंचते हैं। ओला या उबर से ऐप के जरिए कार के साथ शटल और मोटरसाइकिल का भी विकल्प आता है। पीली पट्टी और हेलमेट पहने मोटरसाइकिल टैक्सी के पास सवारी के रूप में बैठने वाले के लिए भी एक हेलमेट होता है, जिसे मोटर साइकिल चलने से पहनना सवारी के लिए अनिवार्य है। न्यूनतम 20-21 रुपए और 5 रुपए प्रति किलोमीटर के शुल्क पर तिपहिया ऑटो के झंझट और खतरनाक तरीके से चलने वाले ई रिक्शा को पूरी तरह से नाकाम साबित कर चुके हैं। लोगों के अनुसार मोटरसाइकिल टैक्सी का इस्तेमाल करने वाले तब ही ऑटो या बस में बैठते हैं, जब शाम को व्यस्त घंटों (पीक आवर्स) में जल्द मोटरसाइकिल टैक्सी नहीं मिलती हैं। बस या ऑटो में भी मोटरसाइकिल टैक्सी जितनी महंगी साबित होती है लेकिन सड़कों पर जाम की वजह से करीब दो गुना समय और घर या ऑफिस के दरवाजे के बजाए काफी दूर पैदल भी चलना पड़ता है। नोएडा में पॉश सेक्टर, बहुमंजिला सोसायटी, होटल, मेट्रो स्टेशन और सेक्टर- 18, एक्सप्रेस वे समेत कई विभिन्न जगहों पर पीली पट्टी वाली मोटरसाइकिल टैक्सियां मिल सकती हैं। ऐप की वजह से नकद या ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी यातायात के इस सस्ते माध्यम को आकर्षित बना रहा है।

12वीं पास चंदन कर रहा है 45-50 हजार महीने की कमाई

ओला कंपनी से जुड़कर मोटरसाइकिल टैक्सी चलाने वाले 12वीं पास चंदन श्रीवास्तव ने बताया कि अधिकांश बुकिंग नोएडा और ग्रेटर नोएडा की मिलती हैं। कभी कभार गाजियाबाद की सवारियां मिलती हैं। टैक्सी के लिए उसने 21 हजार रुपए देकर नई मोटरसाइकिल ऋण पर ली थी। जिसका 2220 रुपए प्रति महीने (कुल 18 किश्त) भुगतान कर रहे हैं। निजी उपयोग के मुकाबले टैक्सी में मोटरसाइकिल के परमिट और फिटनेस का कुछ ज्यादा खर्च तो आया लेकिन 1200-1700 रुपए रोजाना की आमदनी भी हो रही है। चंदन के मुताबिक कभी-कभार कंपनी एक दिन में 20 से ज्यादा बुकिंग पूरी करने पर बोनस भी देती है। सवारियों से मिलने वाली रकम का करीब 25 फीसद रकम टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी रखती है। हर रोज 500 रुपए का पेट्रोल भरवाने पर भी 1200-1700 रुपए प्रतिदिन बच रहे हैं। जबकि 12वीं पास को नोएडा में 10 हजार रुपए महीने की नौकरी भी नहीं मिल रही है। उस पर अपनी मनमर्जी से काम करने की छूट यानी जब चाहे तब मोटरसाइकिल टैक्सी चलाएं और जब नहीं चाहें तो उस दिन छुट्टी एक तरह से कारोबारी का अहसास कराती है। उबर कंपनी से जुड़े मोटरसाइकिल टैक्सी चालक दीपक तिवारी ने बताया कि वह ग्रेटर नोएडा रहता है। ग्रेटर नोएडा के मुकाबले नोएडा में 25 गुना ज्यादा टैक्सियों की मांग है। इस वजह से उसे ज्यादातर नोएडा की ही सवारियां मिलती हैं। उसने 60 हजार रुपए देकर नई मोटरसाइकिल खरीदी थी। न्यूनतम 20 रुपए के शुल्क और 5 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से दीपक दिन भर में सब खर्च चुकाने के बाद 1200-1500 रुपए कमा रहा है।

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