मध्य प्रदेश कांग्रेस में पिछले तीन दिनों से एक जमीन मामले को लेकर खींचतान देखने को मिली। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक फैक्ट-चेक यानी रिसर्च के जरिए मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगाए जा रहे अपनी पार्टी के आरोपों पर सवाल खड़े कर दिए।
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद सार्वजनिक हो गए। भाजपा ने दिग्विजय सिंह की तारीफ की, जबकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उन पर पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को कमजोर करने और अपने बेटे के राजनीतिक हितों की रक्षा करने का आरोप लगाया।
बुधवार तक स्थिति यह हो गई कि मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तीन दिन का “मौन सत्याग्रह” शुरू कर दिया। पार्टी ने अपने नेताओं को टीवी डिबेट में हिस्सा लेने और मीडिया को बयान देने से बचने के निर्देश दिए। कांग्रेस का आरोप है कि मीडिया मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े उज्जैन के जमीन सौदों को पर्याप्त कवरेज नहीं दे रहा है।
विवाद की शुरुआत 24 जून को हुई थी, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को निशाने पर लिया। यह हमला मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा की गई जमीन खरीद से जुड़ी द इंडियन एक्सप्रेस एक रिपोर्ट सामने आने के बाद किया गया था।
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास नाम के एक ट्रस्ट को मात्र एक रुपये के शुल्क पर दे दी गई। उन्होंने पूछा, “इसके ट्रस्टी श्रीराम तिवारी हैं, जो मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार हैं। इस ट्रस्ट को इतनी महंगी जमीन किस आधार पर दी गई?”
यह विपक्ष के लिए भ्रष्टाचार के आरोप को मजबूती से उठाने का एक सीधा और आसान मुद्दा होना चाहिए था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद दिग्विजय सिंह ने ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। अतीत में भाजपा के निशाने पर रहने वाले दिग्विजय सिंह उज्जैन में मीडिया के सामने आए अपनी ही पार्टी के नेतृत्व से किसी स्पष्ट समन्वय के बिना मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोपों की हवा निकाल दी।
दिग्विजय सिंह ने कहा, “यह आरोप लगाया जा रहा है कि करीब 500 करोड़ रुपये की जमीन एक निजी ट्रस्ट को मात्र एक रुपये में दे दी गई है। लेकिन मेरे पास इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं दी गई है। यह ट्रस्ट एक सरकारी ट्रस्ट है। उन्होंने कहा कि मैं बिना किसी जांच-पड़ताल के किसी मुद्दे पर नहीं बोलता। झूठे आरोप लगाने और फिर उससे पैसा कमाने वाले दलालों की कोई कमी नहीं है।”
हालांकि, भाजपा ने इस मुद्दे के हाथ से नहीं जाने दिया और तत्काल इस पर अपना बयान जारी किया। राज्य भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने X पर पोस्ट किया और कहा कि झूठ की उम्र लंबी नहीं होती, और घोषणा की कि पटवारी द्वारा सत्य के रूप में प्रस्तुत किए जाने वाले अभियान को उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने ही ध्वस्त कर दिया है।
भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेश बाजपेयी, जिन्होंने वर्षों से दिग्विजय सिंह पर लगातार हमले किए हैं। अचानक उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को “आईना दिखा दिया” है। उन्होंने कहा कि जहां कांग्रेस पदाधिकारी दस्तावेजों की जांच किए बिना आरोप लगा रहे थे, वहीं दिग्विजय सिंह ने बोलने से पहले कम से कम दस्तावेजों की जांच तो की।
हुजूर के विधायक रामेश्वर शर्मा, जो दिग्विजय सिंह को वैचारिक आधार पर निशाना बनाने का लंबा इतिहास रखते हैं। उन्होंने उनका समर्थन करते हुए तथ्यों पर आधारित रुख अपनाने के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सिंह ने पटवारी के आरोपों की पोल खोल दी है, जिससे कांग्रेस को अपने ही विरोधाभासों का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बात सिर्फ तारीफ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने तो खुलेआम दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का न्योता तक दे डाला है। लोधी ने दिग्विजय सिंह को एक “भला और बुजुर्ग इंसान” बताते हुए कहा कि दशकों की सेवा के बाद भी कांग्रेस उन्हें आगे नहीं बढ़ने दे रही है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं, तो उन्हें “राजशाही सम्मान” दिया जाएगा।
कांग्रेस द्वारा क्षति नियंत्रण
इस पर कांग्रेस ने भी तुरंत मोर्चा संभाला। कांग्रेस नेता रवि सक्सेना ने पलटवार करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह का “डीएनए पूरी तरह कांग्रेस से जुड़ा है।” उन्हें पार्टी का एक वफादार सिपाही बताते हुए सक्सेना ने कहा कि वह ऐसे नेता हैं, जिनसे भाजपा हमेशा “थरथर कांपती” है। उन्होंने भाजपा को नसीहत दी कि वह दिग्विजय सिंह के पाला बदलने के सपने देखना बंद करें।
सबसे तीखा हमला पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी और कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी की तरफ से आया। उन्होंने सोशल मीडिया पर सीधे सवाल दाग दिया कि दिग्विजय सिंह के ‘नागपाश’ से कांग्रेस कब मुक्त होगी?
पार्टी के भीतर की इस कलह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चिंतित कर दिया। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की और इस घटनाक्रम को पार्टी के भीतर अज्ञात व्यक्तियों द्वारा रची गई साजिश बताया, जबकि भाजपा सरकार खुद भी कई समस्याओं से जूझ रही थी।
यह किसी राज्य इकाई में चल रहे मतभेदों का सामान्य शोर नहीं था, बल्कि एक संभावित दरार का संकेत था, जिसके केंद्र में वह नेता था जिसे पिछले तीन दशकों से मध्य प्रदेश में पार्टी मामलों में सर्वोच्च निर्णय लेने वाला माना जाता रहा है। हालांकि अब पार्टी पूरी तरह से उन्हीं के इर्द-गिर्द नहीं घूमती, फिर भी उनका संगठनात्मक नेटवर्क राज्य के किसी भी अन्य नेता से कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने दशकों से दलबदल और चुनावी हार का सामना किया है और भाजपा के सबसे पसंदीदा खलनायक और निशानेबाज रहे हैं। यही कारण है कि इस घटनाक्रम ने पार्टी नेताओं को गहरा आघात पहुँचाया।
मंगलवार शाम तक, जब इस घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री के खिलाफ उनके मामले को पूरी तरह से धूमिल करने की धमकी दी, तो पटवारी और सिंह एक साथ पत्रकारों के सामने एक जल्दबाजी में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित हुए, और दोनों स्पष्ट रूप से उस एकता को प्रदर्शित करने के लिए काम कर रहे थे जिसे पिछले 48 घंटों ने पूरी तरह से कमजोर कर दिया था।
दोनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि मध्य प्रदेश में पूरी कांग्रेस पार्टी डॉ. मोहन यादव सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एकजुट है। राज्य के मुख्यमंत्री और उनके परिवार द्वारा किए गए भूमि सौदों से संबंधित सभी शिकायतों की हमारे स्तर पर जांच की जा रही है। हम सभी मिलकर इस मुद्दे पर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
दिग्विजय सिंह ने तनाव कम करने की कोशिश करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी पटवारी या पार्टी के किसी अन्य सहयोगी पर नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि ये टिप्पणी दलाल उपनाम वाले एक पत्रकार पर थी। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी और मेरे बीच मतभेदों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। वह मेरे बेटे की तरह हैं। मैंने कांग्रेस पार्टी में आधी सदी से अधिक समय बिताया है। मैं पार्टी के किसी भी नेता, यहां तक कि राज्य पार्टी प्रमुख के लिए भी, कभी ‘दलाल’ शब्द का प्रयोग नहीं कर सकता। मैंने ‘दलाल’ शब्द का प्रयोग एक पत्रकार के लिए किया था।
Express Investigation: जहां बन रहे नए हाईवे, वहां मोहन यादव के परिजनों ने खरीदी 168 एकड़ जमीन
मध्य प्रदेश का उज्जैन इस समय बड़े स्तर पर शहरी विकास देख रहा है। नई सड़कें बन रही हैं, हाईवे आ रहे हैं, जमीन के उपयोग में बदलाव हो रहे हैं और रिहायशी परियोजनाओं की वजह से रियल एस्टेट के लिए उज्जैन एक मुफीद जगह साबित हो रहा है। अब इंडियन एक्सप्रेस को अपनी पड़ताल में पता चला है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनके परिजन, भाई-बहन और चचेरे भाइयों ने इसी उज्जैन में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है। पढ़ें पूरी खबर।
