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मोहन भागवत को सपा नेता ने दी खुली चुनौती, कहा- दम है तो अयोध्‍या में एक ईंट रखकर दिखाएं

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता चौधरी साहिब सिंह ने कहा कि यूपी में चुनाव से पहले राम मंदिर का राग क्‍यों अलाप रहे हैं मोहन भागवत?

Author लखनऊ | Updated: December 6, 2015 7:30 PM
आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के सवा साल पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की बात क्यों याद आई? मोहन भागवत के मंदिर राग पर समाजवादी पार्टी ने यह कह कर खुली चुनौती दी है कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, अयोध्या में कोई एक र्इंट रखकर दिखाए। भागवत के मंदिर राग पर सपा आरोप लगाती है कि विकास और महंगाई से जनता का ध्यान भटकाने के लिए मोहन भागवत ने बेहद सुनियोजित तरीके से कोलकाता में मंदिर राग अलापा।

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की बात पर बाबरी मस्जिद केस के मुद्दई मो. हाशिम अंसारी कहते हैं, यदि उनमें दम है तो अयोध्या आकर मंदिर का निर्माण कराएं। छह दिसंबर को उन्होंने मोहन भागवत के नाम पर मातम करने का एलान किया है। छह दिसंबर को विवादित ढांचे को गिराए जाने के तेरह साल पूरे होने पर अयोध्या छावनी में तब्दील हो चुकी है। मोहन भागवत के बयान के बाद वहां सख्ती अधिक है। उनके बयान पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता चौधरी साहिब सिंह कहते हैं, भाजपा किसी मुगालते में न रहे।

उत्तर प्रदेश में समाजवादियों की सरकार है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। मंदिर निर्माण का दिवास्वप्न देखने की बात तो छोड़िए, हिम्मत हो तो वहां एक र्इंट रखकर दिखाएं। उत्तर प्रदेश में विकास के नाम पर पिछले डेढ़ साल में भाजपा ने किया क्या? प्रधानमंत्री समेत प्रदेश से चुनकर गए भाजपा के 71 सांसदों से यह सवाल होना चाहिए। इस सवाल से जनता का ध्यान भटकाने के लिए मंदिर का पुराना राग अलापा जा रहा है। लेकिन दो सौ रुपए किलो बिक रही दाल और गरीबों की कमर तोड़ रही महंगाई से ध्यान भटका पाना भाजपा के बस की बात नहीं। वो कोई भी राग क्यों न अलाप लें, दोबारा जनता उनके झांसे में आने वाली नहीं है।

मोहन भागवत के मंदिर राग पर बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों की ऐसी बदजुबानी के कारण ही देश का माहौल खराब हुआ। ऐसे ही बयानों से असहिष्णुता बढ़ी है। सवाल मंदिर निर्माण का नहीं है। सवाल देशद्रोह का है। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो किस हैसियत से मोहन भागवत ने अयोध्या में मंदिर निर्माण की बात कही। यदि कही भी तो मोदी सरकार ने उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? भाजपा मंदिर सरीखे कितने ही राग क्यों न अलाप ले, देश की जनता के सामने जब भोजन आता है तो उसे सरकार और उसके वादों की असलित के बीच का फर्क रोज दो समय नजर आता है। जो खुद को संविधान और सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा समझने का मुगालता पाले हैं, उनके इस भ्रम को उत्तर प्रदेश और देश की जनता जल्द तोड़ देगी।

संघ प्रमुख मोहन भागवत के मंदिर राग पर विपक्ष के हमलावर तेवर को भाजपा तवज्जो देने की मुद्रा में नहीं है। भाजपा के वरिष्ठ नेता हृदय नारायण दीक्षित कहते हैं, संघ और विश्व हिंदू परिषद बहुत पहले से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की बात कर रहे हैं। इस बयान में अचंभित होने जैसा तो कुछ है नहीं? यदि विपक्षी दलों के नेताओं को ऐसा प्रतीत होता है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण की बात कर वोट बैंक को समेटने का प्रयास किया जा रहा है तो वे भी मंदिर निर्माण का समर्थन करें। ऐसा करने से उनके वोट तो बढ़ेंगे।

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