अंतिम संस्कार में मुंबई से सूरत जा रहे लोगों की मॉब लिंचिंग, बचाने आई पुलिस टीम पर भी 400 लोगों ने लाठी-डंडे, तलवार से बोला हमला

लॉकडाउन के बावजूद इनलोगों ने मुंबई के कांदिबली से करीब 120 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी। महाराष्ट्र और केंद्रशासित प्रदेश दादरा और नागर हवेली की सीमा पर गढ़चिंचल गांव के पास उनकी गाड़ी को वन विभाग के संतरी ने रोकी, जहां ये घटना घटी

पीड़ितों ने किराए पर एक वैन ली थी और कुद ही ड्राइव कर रहे थे। (एक्सप्रेस फोटो- दीपक जोशी)

मुंबई के कांदिवली से गुजरात के सूरत अंतिम संस्कार में भाग लेने जा रहे तीन लोगों की महाराष्ट्र के पालघर जिले के गढ़चिंचले में मॉब लिंचिंग हो गई। ग्रामीणों ने उन पर लाठी,डंडों और तलवार से हमला बोल दिया। जब उन्हें बचाने पुलिस टीम पहुंची तो गांव वालों ने उन पर भी हमला बोल दिया। यह घटना गुरुवार (17 अप्रैल) की रात की है। ग्रामीणों ने उन तीनों मुसाफिरों को चोर समझ लिया था।

पालघर के जिला कलेक्टर कैलाश शिंदे ने बताया, “प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुशील गिरि महाराज, जो कांदिवली में एक आश्रम में रहते हैं, दो अन्य लोगों जयेश और नरेश येलगडे के साथ एक वैन में यात्रा कर रहे थे, जिसे उन्होंने सूरत में एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए किराए पर लिया था। इनमें से एक शख्स गाड़ी चला रहा था।” बतौर जिलाधिकारी, लॉकडाउन के बावजूद इनलोगों ने मुंबई के कांदिबली से करीब 120 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी। महाराष्ट्र और केंद्रशासित प्रदेश दादरा और नागर हवेली की सीमा पर गढ़चिंचल गांव के पास उनकी गाड़ी को वन विभाग के संतरी ने रोकी, जहां ये घटना घटी।

पिछले कुछ दिनों से इलाके में ये अफवाह थी कि रात में फसल काटने वाला गिरोह या बच्चे को उठाने वाला चोर गिरोह सक्रिय है। इससे बचने के लिए ग्रामीणों ने निगरानी दल का गठन किया था। इसी वजह से पिछले कुछ दिनों में मारपीट की ऐसी ही दो घटनाएं घट चुकी हैं। कुछ दिनों पहले लोगों ने एक मेडिकल अफसर की भी पिटाई कर दी थी। पिछले हफ्ते एडिशनल एसीपी की अगुवाई में एक पुलिस टीम दादरा एवं नागर हवेली जा रही थी, तभी ग्रामीणों ने उन पर भी हमला बोल दिया था।

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बुधवार की रात 10 बजे के करीब जब ये तीनों लोग वन विभाग के दो संतरियों के साथ बातचीत कर रहे थे, तभी गांव का ये निगरानी दल वहां आ पहुंचा और उनकी गाड़ी में ताक-झांक करने लगा। इस पर उनसे बहस हो गई। बात बढ़ने पर गांव वालों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद वन विभाग के गार्ड ने 35 किलोमीटर दूर कासा थाना को सूचना दी।

जब थाने से चार पुलिसकर्मी वहां पहुंचे, तबतक ग्रामीणों ने उन तीनों की जबर्दस्त पिटाई कर दी थी। गाड़ी के शीशे भी तोड़ डाले थे। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची पुलिस टीम को भी धमकी दी। वहीं खड़े कुछ लोग घटना का वीडियो बना रहे थे। जिसमें दिख रहा है कि लोग ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों और तलवार से तीनों पर हमला बोल रहे हैं।

कुछ देर के बाद पुलिस की दूसरी टीम भी आई लेकिन 400 लोगों की उन्मादी भीड़ ने उनपर भी हमला बोल दिया। पुलिस ने तीनों जख्मी को किसी प्रकार अपनी गाड़ी में बैठाया तो लोग पुलिस गाड़ी पर हमला करने लगे। बाद में पुलिसवाले वहां से किसी तरह निकलने में कामयाब रहे। कई पुलिसकर्मी भी इस हमले में घायल हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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