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जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस का दावा- हिज्‍बुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ फौजी इदरिस मीर, सेना अब भी मान रही लापता

कुछ समय पहले दक्षिणी कश्मीर से लापता हुए सेना के जवान का सुराग मिल गया है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस (फाइल फोटो)

कुछ समय पहले दक्षिणी कश्मीर से लापता हुए सेना के जवान का सुराग मिल गया है। पुलिस का दावा है कि इसी महीने वह आतंकी संगठन हिज्ब—उल—मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। पुलिस के मुताबिक लापता होने वाले जवान का नाम इदरीस मीर है। वह सेना की जम्मू—कश्मीर लाइट इंन्फैंट्री में तैनात था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वह रविवार को आतंकी संगठन में शामिल हो गया है।

अधिकारियों ने बताया कि मीर शोपियां जिले से लापता हो गया था। वह लापता दो स्थानीय नागरिकों के साथ आतंकी ग्रुप में शामिल हो गया है। हालांकि सेना का अभी भी यही कहना है कि इदरीस लापता है और उनके पास कोई सूचना नहीं है कि वह आतंकी संगठन में शामिल हो गया है। वहीं पुलिस के मुताबिक मीर इससे पहले झारखण्ड में तैनात था. वह अपनी तैनाती घाटी में किए जाने से खुश नहीं था।

इदरीस मीर के आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। बीते कुछ दिनों में सेना से आतंकियों की मुठभेड़ में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि हिज्ब—उल—मुजाहिदीन और जैश—ए—मोहम्मद ने इसके बाद भी अपनी गतिविधियां बंद नहीं की हैं। आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आतंकी संगठनों ने दक्षिण कश्मीर में युवाओं को भर्ती करने का अभियान जोर—शोर से छेड़ा हुआ है। ये सभी भर्तियां सोशल मीडिया के माध्यम से की गई हैं।

साल 2011 से अगर तुलना करें तो 2017 में आतंकी भर्ती की रफ्तार चौंका देती है। साल 2011 में कुल 23 आतंकियों को भर्ती किया गया था। वहीं ये आंकड़ा 2017 तक बढ़कर 100 को पार करने की कगार पर पहुंच गया है। इनमें सबसे ज्यादा भर्ती हिज्ब—उल—मुजाहिदीन ने की है। इनमें से करीब 50 युवाओं को तो सिर्फ बारामूला जिले के आसपास से चुनकर आतंकी बनाया गया। आईबी ने बारामूला और शोपियां की पहचान सबसे अधिक आतंकियों की भर्ती वाले जिलों के तौर पर की है।

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