उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक वकील की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों वारदात को उस वक्त अंजाम दिया जब वकील राजीव सिंह शनिवार सुबह 7:15 बजे मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान दो हमलावर बाइक से आए और उन्हें रोककर सीने में तमंचा सटाकर गोली मार दी। घटना को अंजाम देने के हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना की पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद हो गई है।

राजीव सिंह की पत्नी ग्राम प्रधान हैं। राजीव खुद भी दो बार प्रधान रह चुके थे। वारदात के बाद भागते वक्त हमलावरों की बाइक बंद हो गई। लोग उन्हें पकड़ने दौड़े तो उन्होंने तमंचा तान दिया। डरकर लोग पीछे हट गए। घटना जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर कटरा कोतवाली क्षेत्र के कतवारु का पुरा मोहल्ले की है।

वकील की गोली मारकर हत्या के मामले में मिर्जापुर एसपी अपर्णा कौशिक ने बताया, “हमें सूचना मिली थी कि राजीव सिंह नाम के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। पुलिस की फील्ड टीम मौके पर पहुंची और सभी सबूत जुटाए। परिवार से मिली शिकायत के आधार पर आरोपियों के नाम दर्ज कर लिए गए हैं। तकनीकी निगरानी से पता चला कि आरोपी मृतक के गांव का निवासी था और उनके बीच पुराना विवाद था। संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं और कार्रवाई जारी है।”

वकील की पत्नी प्रतिभा सिंह गांव में प्रधान, परिवार शहर में रहता है मूलरूप से विंध्याचल थाना के देवरी गांव के रहने वाले राजीव सिंह उर्फ रिंकू कटरा कोतवाली में रहते थे। 2011 में यहां जमीन खरीदकर मकान बनवाया था। बच्चों की पढ़ाई की वजह से यहीं रहते थे। यहीं से कोर्ट आते-जाते थे। साथ में गांव भी आना जाना लगा रहता था। उनके दो बेटे ओम (18) और सार्थक (12) हैं।

एसएसपी ने बताया कि मुख्य आरोपी की पहचान हो गई है। मुख्य आरोपी राजेंद्र सोनकर भी वकील के गांव देवरी का रहने वाला है। प्रधानी का चुनाव लड़ चुका है। उसकी राजीव सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह से चुनावी रंजिश चल रही थी। हालांकि, दूसरे आरोपी की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस के मुताबिक, राजेंद्र सोनकर भी कतवारू का पुरा यानी वकील के घर के पास किराए में रहता है। उसे पहले से पता था कि राजीव मॉर्निंग वॉक के लिए हर दिन कितने बजे घर से निकलते हैं। पूरी साजिश रचकर उसने वारदात की।

पड़ोसियों ने क्या बताया?

पड़ोसियों ने बताया कि राजेंद्र सोनकर ने करीब सात महीने पहले भी राजीव सिंह पर बीच रास्ते रोककर हमला किया था। उसने बाइक रोक कर तमंचा राजीव सिंह पर तान दिया था। राजीव सिंह ने इस मामले में कटरा कोतवाली में तहरीर भी दी थी, लेकिन पुलिस की ओर से समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पड़ोसी मनीष दुबे ने बताया कि राजेंद्र सोनकर अक्सर घर पर आता था। कुछ महीने विवाद के बाद आना-जाना बंद हो गया। उसके बाद से अक्सर सुबह घर के पास टहलता दिखता था। उस पर पहले भी एक वकील की हत्या का आरोप लग चुका हैं। उसने अपनी नानी की हत्या कर नगर के डंगहर मोहल्ला स्थित आवास पर कब्जा कर रखा है।

मृतक वकील के पिता ने क्या कहा?

मृतक वकील के पिता जटा शंकर सिंह ने बताया कि राजेंद्र को भाई की तरह मानता था मेरा बेटा। उसके मुकदमों की पैरवी भी करते थे। कोई भी विवाद होने पर मामला सुलह समझौते के आधार पर समाप्त करा देते थे। हत्या की वजह गांव की रंजिश है। उन्होंने बताया कि राजीव सिंह दो बार देवरी के ग्राम प्रधान रहे। महिला सीट होने पर उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ग्राम प्रधान है।

हत्यारोपियों के एनकाउंटर की मांग पर अड़े वकील

राजीव सिंह के साथी वकीलों ने तब तक अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है, जब तक आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो जाती। उनकी मांग थी कि पहले हत्यारों का एनकाउंटर किया जाए, बुलडोजर एक्शन लिया जाए, तभी राजीव सिंह का शव पैतृक गांव जाएगा। कमिश्नर राजेश प्रकाश, डीआईजी आरपी सिंह, जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार समेत तमाम अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन अधिवक्ता अड़े रहे। उनकी आपस में नोकझोंक भी हुई। बाद में आश्वासन के बाद सभी शांत हुए।

जिसका कभी लड़ा था केस, उसी ने कर दी हत्या

वहीं, अभी तक की पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी पर 2020 में आर्म्स एक्ट का केस हुआ था। उस मामले में राजीव सिंह ही राजेंद्र सोनकर की पैरवी कर रहे थे। परिजनों ने बताया कि गांव का होने के नाते अक्सर वकील राजीव पैसों से राजेंद्र की भी मदद करते हैं। पुलिस ने बताया कि राजेंद्र सोनकर पहले भी तीन बार जेल जा चुका है। वो ड्रग्स का आदी है।

जस्टिस वर्मा ने क्यों दिया इस्तीफा? इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर वकील ने बताई संभावित वजह

दिल्ली स्थित बंगले में कथित तौर पर बोरों में पड़े नोट जलने के मामले से विवाद में आए जस्टिस यशवंत वर्मा शुक्रवार को पद से इस्तीफा दे दिया। घटना के समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में नियुक्त थे। विवाद के बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट हो गया था। सुप्रीम कोर्ट की समिति ने उनके खिलाफ जाँच की अनुशंसा की थी जिसके बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। संसदीय समिति द्वारा उनके खिलाफ जाँच पूरा करने से पहले ही जस्टिस वर्मा द्वारा इस्तीफा देने से मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म हो गया। पढ़ें पूरी खबर।