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मिर्जापुर संसदीय सीट: कालीन उद्योग और बुनकरों की समस्या मुद्दा नहीं

मिर्जापुर में कुल 1805886 मतदाता हैं। जिनमें दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 25 फीसद यानी 452381 है। इस सीट पर सबसे अधिक पिछड़ों की संख्या है जो लगभग 49 फीसद 890221 हैं, जबकि सामान्य 25 फीसद 424022 है।

राम चरित्र निषाद और ललितेश त्रिपाठी।

वाराणसी के बाद पूर्वांचल की सबसे आकर्षण की सीटों में एक मानी जा रही मिर्जापुर संसदीय सीट पर चुनाव जोर पकड़ रहा है। इस सीट से केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, राजग के अपना दल कोटे से चुनाव मैदान में है। महागठबंधन की ओर से यह सीट सपा के खाते में है। यहां सपा ने राम चरित्र निषाद को मुकाबले में उतारा है। निषाद पहले भाजपा में थे और मछलीशहर सीट से सांसद थे। टिकट न मिलने पर पाला बदल दिया। सपा ने उन्हें मिर्जापुर से अपने पहले घोषित उम्मीदवार राजेंद्र बिंद को बदलकर टिकट दिया है।

कांग्रेस ने एक बार फिर पुराने कांग्रेजी दिग्गज कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेश त्रिपाठी पर अपना भरोसा जताया है। वैसे यहां कुल नौ उम्मीदवार हैं।
मां विंध्यवासिनी की नगरी में पीतल उद्योग, पत्थर उद्योग, कालीन उद्योग एवं बुनकरों की समस्या आदि कोई मुद्दा नहीं है। अपना दल उम्मीदवार अनुप्रिया पटेल अपने विकास कार्यो के साथ मोदी को पुन: प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांग रहीं हैं। राष्ट्रवाद एवं विकास पर उनका ज्यादा ध्यान है। सपा उम्मीदवार रामचरित्र निषाद अखिलेश और मायावती का गुणगान कर रहे हैं। मिर्जापुर में नए होने की कारण विकास का कोई विजन नहीं प्रस्तुत कर पा रहे हैं। पूर्व सांसद फूलन देवी का भी नाम लेना नहीं भूलते हंै। वे फूलन की बिरादरी के भी हैं। कांग्रेस उम्मीदवार ललितेश पति त्रिपाठी अपने परिजनों द्वारा जिले में कराए गए विकास कार्यों के साथ कांग्रेस के घोषणा पत्र के प्रमुख अंश न्याय के 72 हजार रुपए और 22 लाख नौकरियों को जनता के बीच प्रमुखता से रख रहें हैं।

मिर्जापुर में कुल 1805886 मतदाता हैं। जिनमें दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 25 फीसद यानी 452381 है। इस सीट पर सबसे अधिक पिछड़ों की संख्या है जो लगभग 49 फीसद 890221 हैं, जबकि सामान्य 25 फीसद 424022 है। इस चुनाव में मुद्दों के स्थान पर जातीय समीकरणों की चर्चा चल रही है। जातीय गुणाभाग एवं जोड़ घटाना चल रहा है। पिछले चुनाव में अपना दल उम्मीदवार अनुप्रिया पटेल को बड़े अंतर से सफलता मिली थी। उन्हें लगभग 52 फीसद मत मिले थे। प्रचार के क्षेत्र में भाजपा अपना दल उम्मीदवार अपने विरोधियों से काफी आगे है। सपा ने यहां अंतिम क्षण में उम्मीदवार बदला है। साथ ही सपा व बसपा में तालमेल भी नहीं बन पाया है। सपा उम्मीदवार को अपने परंपरागत वोट का सहारा है। कांग्रेस ललितेश पति त्रिपाठी चुनाव को त्रिकोणीय बनाने में लगे हैं पर जातीय समीकरणों आड़े आ रहे हैं।

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