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नाबालिग छात्र कृष राज ने राष्ट्रपति को पत्र भेज मांगी इच्छा मृत्यु, जानिए वजह

छात्र कृष राज ने इसी साल मानवाधिकार आयोग से लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तक को एक पत्र भेज इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है। पत्र में उसने लिखा कि मां अपनी नौकरी और तरक्की के लिए बचपन से ही दादा-दादी के पास छोड़ दिया। माता सुजाता कुमारी बैंक में नौकरी करती है।

president kovind राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद फोटो सोर्स- जनसत्ता

आठवीं कक्षा के नाबालिक बालक कृष राज मित्र (14) ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को पत्र भेज मांगी गई इच्छा मृत्यु मामले की जांच ज़िलाधीश प्रणब कुमार ने करा ली है। उन्होंने बताया कि अब जल्द ही बच्चे की काउंसलिंग कराने के बाद पूरी रपट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेज दी जाएगा। ज़िलाधीश ने बताया कि कहलगांव के एसडीएम और एसडीपीओ को बालक की सुरक्षा के हालात की भी समय-समय पर समीक्षा करने को कहा गया है। बहरहाल वह कहलगांव एनटीपीसी में ड्राइवर के पद से रिटायर अपने दादा के साथ रह रहा है। डीएम बताते है कि उसके माता-पिता के आपसी झगड़े और दूसरे हरेक पहलुओं पर जांच कराई गई है।

दरअसल छात्र कृष राज ने इसी साल मानवाधिकार आयोग से लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तक को एक पत्र भेज इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है। पत्र में उसने लिखा कि मां अपनी नौकरी और तरक्की के लिए बचपन से ही दादा-दादी के पास छोड़ दिया। माता सुजाता कुमारी बैंक में नौकरी करती है। और पटना में पदस्थापित है। पिता मनोज कुमार मित्र झारखंड के देवघर में ग्रामीण विकास महकमा में कार्यरत है। और कैंसर की बीमारी से पीड़ित है। मेरे सामने मैं अपने पापा को खोना नहीं चाहता हूं। उसने पत्र में पिता पर माता द्वारा किए मुकदमेबाजी का भी जिक्र किया है। पत्र पांच पन्ने का है।

जिसपर 27 मार्च 19 को राष्ट्रीय महिला आयोग ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मामले की जांच कराने को कहा। इस पर बाल संरक्षण के वरीय परामर्शदाता रमन कुमार गौड़ ने भागलपुर के ज़िलाधीश को 29 अप्रैल 2019 को पत्र भेज मामले के तह तक जाकर जांच कराने को कहा। साथ ही रिपोर्ट दस रोज में सौंपने की हिदायत दी। शायद संसदीय चुनाव की वजह से मामला दब गया।

मगर इधर प्रधानमंत्री कार्यालय के संज्ञान लेने पर ज़िलाधीश का दफ्तर हरकत में आया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्मरण पत्र भेज सात दिनों में जबाव मांगा है। जानकार बताते है कि बालक के माता-पिता के आपसी रिश्ते 2011 से ज्यादा बिगड़े है। मगर दुखद पहलू यह है कि उसकी पीड़ा बच्चे को झेलनी पड़ रही है।

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