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बिलों की खरीद-फरोख्त से रोजाना हो रहा है लाखों का गोलमाल

जीएसटी (वस्तु व सेवाकर) और ई-वे बिल लागू होने के बाद भी दिल्ली से रोजाना करोड़ों रुपए के माल की टैक्स चोरी कर नोएडा में खपाया जा रहा है। बगैर बिल के माल खपाने के खेल में कुछ राज्य जीएसटी अफसरों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।

Author May 2, 2018 5:50 AM
जीएसटी विधेयक (वस्तु एवं सेवा कर)

जीएसटी (वस्तु व सेवाकर) और ई-वे बिल लागू होने के बाद भी दिल्ली से रोजाना करोड़ों रुपए के माल की टैक्स चोरी कर नोएडा में खपाया जा रहा है। बगैर बिल के माल खपाने के खेल में कुछ राज्य जीएसटी अफसरों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। खास बात यह है कि सीमेंट और सरिया को दिल्ली से नोएडा के खुदरा व्यापारियों को बगैर बिल के कम दाम में बेचा जा रहा है। जबकि बिल को 5-6 फीसद दाम पर बिल्डर कंपनियां खरीद रही हैं। इस घालमेल से बिल्डर को सीधे 10 फीसद का फायदा होता है। वह 18 फीसद जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) क्लेम कर रहा है। नोएडा में निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबारियों ने इस घालमेल की सूचना व्यापारियों की संस्था – उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल – को दी और बिलों की खरीद फरोख्त से रोजाना लाखों रुपए की कर चोरी होने का आरोप लगाया है।

सरिया मिल से माल 18 फीसद जीएसटी लगकर बाहर निकलता है। मिल और बाजार के बीच में दलाल सक्रिय हो रहे हैं। जो माल को बगैर बिल के बाजार कीमत से 1-1.50 रुपए प्रति किलो सस्ता कर नोएडा के बाजार में खपा रहे हैं। माल बिकने के बाद उस बिल को बिल्डर को 5-6 फीसद पर बेच रहे हैं। यानी जो 1-1.50 रुपए खरीद कीमत से कम भाव पर सरिया बेचकर नुकसान हुआ, उसकी कई गुना ज्यादा भरपाई 6 फीसद पर केवल बिल बेचकर दलाल विभाग को लाखों रुपए के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। बिल्डर इस बिल के आधार पर 18 फीसद का इनपुट क्रेडिट क्लेम कर रहा है। इससे बिल्डर को सीधे तौर पर कम से कम 10 फीसद का फायदा हो रहा है।

इसी तरह सीमेंट की बिक्री में भी बड़े पैमाने पर कर चोरी नोएडा में हो रही है। सीमेंट की बड़ी कंपनियां अपने ट्राले दिल्ली से लगे मयूर विहार फेज-3 इलाके में खड़े कर रही हैं। यहां से अन्य छोटे वाहनों से सीमेंट को नोएडा की दुकानों पर पांच रुपए की छूट देकर बगैर बिल के पहुंचाया जा रहा है। खास बात यह है कि सीमेंट लेकर आने वाले वाहनों को राज्य जीएसटी अधिकारी नहीं रोकते हैं, आरोप है कि उनको पहले से वाहन का नंबर देकर हिस्सेदारी में शामिल कर लिया जा रहा है। सीमेंट पर 28 फीसद जीएसटी है। 300 रुपए कीमत वाले सीमेंट के बोरे पर पांच रुपए की छूट यानी करीब 2 फीसद का लाभ देकर व्यापारी को मूर्ख बनाया जा रहा है। वास्तविक बिल को दलाल पांच फीसद पर दिल्ली के अन्य किसी बड़े व्यापारी या दिल्ली के बिल्डर को बेचकर कमाई कर रहे हैं। बिल खरीदने वाले को भी इससे करीब 20 फीसद का सीधे तौर पर मुनाफा हो रहा है। इस वजह से सीमेंट और सरिया पर स्टेट जीएसटी के माध्यम से राज्य सरकार को राजस्व की चपत लग रही है। स्टेट जीएसटी के अतिरिक्त आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि दोषियों को पकड़ने के लिए खोड़ा और हरि दर्शन चौकी वाले रास्ते पर मुस्तैदी बढ़ाई जा रही है। मामले में लिप्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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