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मिड-डे मील निगरानी में लापरवाही पर तीन राज्यों पर गिरी गाज, सुप्रीम कोर्ट ने ठोंका 50-50 हजार रुपये का जुर्माना

उच्चतम न्यायालय ने सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन और स्वच्छता की निगरानी के लिये एक चार्ट के साथ आॅनलाइन लिंक देने में विफलता के लिये झारखंड, तमिलनाडु और उत्तराखंड पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

Author नई दिल्ली | August 2, 2018 2:16 PM
सुप्रीम कोर्ट (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन और स्वच्छता की निगरानी के लिये एक चार्ट के साथ आॅनलाइन लिंक देने में विफलता के लिये झारखंड, तमिलनाडु और उत्तराखंड पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस बात पर नाखुशी जताई कि चूक करने वाले इन तीन राज्यों ने अब तक इस संबंध में शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया है। पीठ ने कहा, ‘‘इन तीन राज्यों की चूक के मद्देनजर इन राज्यों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इस राशि को किशोर न्याय से जुड़े मुद्दों में इस्तेमाल के लिये आज से चार सप्ताह के भीतर उच्चतम न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा किया जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित वकील ने पीठ से कहा कि कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने वेबसाइट पर अलग लिंक नहीं दिया है, जबकि ऐसा न्यायालय के निर्देश की शर्तों के अनुसार करना था और उन्होंने कोई चार्ट नहीं भरा है। पीठ ने कहा, अन्य चूक करने वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अरूणाचल प्रदेश, दादरा एवं नागर हवेली और पुडुचेरी शामिल हैं। फिलहाल हम इन राज्यों पर जुर्माना नहीं लगा रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि ये राज्य समय-समय पर इस अदालत द्वारा दिये गए निर्देशों का पालन करेंगे।’’ पीठ ने इसके बाद मामले की सुनवाई की अगली तारीख 20 सितंबर को निर्धारित कर दी।

न्यायालय मध्याह्न भोजन के संबंध में एनजीओ ‘अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार निगरानी परिषद’ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 23 मार्च को राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों से मध्याह्न भोजन योजना का लाभ पा रहे कुल छात्रों की संख्या समेत अन्य सूचनाएं तीन महीने के भीतर अपनी वेबसाइटों पर डालने को कहा था।

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