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ममता और मेट्रो चैनल : 10 साल पहले यहां किए अनशन ने बनाया था CM, अब PM बनने के लिए दे रहीं चुनौती

धरने के लिए ममता ने जिस मेट्रो चैनल एरिया का चयन किया है वो उनके सियासी करियर में बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 10 साल पहले इसी जगह किए विरोध प्रदर्शन ने उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी दिलाई थी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Source: PTI)

शारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई और कोलकाता पुलिस के बीच हुए बवाल के बाद रविवार को पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने धरना शुरू कर दिया है। धरने के लिए ममता ने जिस मेट्रो चैनल एरिया का चयन किया है वो उनके सियासी करियर में बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 10 साल पहले इसी जगह दिए एक धरने ने उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी दिलाई थी। रविवार की शाम से अब तक के घटनाक्रम ने ममता को विपक्ष में और मजबूती दी है। मोदी सरकार के खिलाफ इस तरह से आवाज उठाने के बाद उन्हें विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

13 साल पहले शुरू हुई थी वो लड़ाईः मई 2006 में तत्कालीन सीपीआई की अगुवाई वाली सरकार ने नैनो प्लांट लगाने के लिए टाटा मोटर्स को सिंगूर में 1000 करोड़ की जमीन दी थी। इस फैसले का विपक्ष में बैठी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का कड़ा विरोध किया। 18 जुलाई 2006 को ममता ने जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया।

10 साल पहले दिया था धरनाः जनवरी 2008 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सिंगूर जमीन अधिग्रहण को जायज ठहराया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया। इसी बीच अगस्त 2008 में ममता ने सिंगूर के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। बाद में उन्होंने अपने आंदोलन को सिंगूर से कोलकाता ट्रांसफर किया और मेट्रो चैनल के बाहर अनशन जारी रखा। राज्यभर में तृणमूल कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया।

तब विधानसभा, अब लोकसभा! 2008 के आंदोलन का फायदा ममता को अगले 2011 के विधानसभा चुनाव में मिला। 34 साल के वाम शासन का अंत कर राज्य में ममता ने सरकार बनाई और मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मौजूदा दौर में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्ष में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर सबसे बड़ा सवाल है। ऐसे में ममता बनर्जी का मोदी सरकार से यूं टकराना उनकी स्थिति को मजबूत कर सकता है। गौरतलब है कि 2014 में मोदी लहर के बावजूद ममता बनर्जी अपना किला सुरक्षित रखने में सफल हुई थीं। उस चुनाव में ममता बनर्जी 34 सीटों के साथ राहुल गांधी (44 सीट) और जयललिता (37 सीट) के बाद विपक्ष में तीसरे नंबर पर रही थीं।

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