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#MeToo: एमजे अकबर के खिलाफ आईं 19 महिला पत्रकार, केंद्रीय मंत्री के खिलाफ देंगी गवाही

मी टू आंदोलन के जोर पकड़ने के साथ ‘द एशियन एज’ अखबार में काम कर चुकीं 19 महिला पत्रकार अपनी सहकर्मी प्रिया रमानी के समर्थन में आईं जिन्होंने केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

Author October 17, 2018 1:41 PM
Me Too मूवमेंट के तहत लगे आरोपों के बाद एमजे अकबर ने दिया इस्तीफा। (PTI Photo)

मी टू आंदोलन के जोर पकड़ने के साथ ‘द एशियन एज’ अखबार में काम कर चुकीं 19 महिला पत्रकार अपनी सहकर्मी प्रिया रमानी के समर्थन में आईं जिन्होंने केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इन महिला पत्रकारों ने एक संयुक्त बयान में रमानी का समर्थन करने की बात कही और अदालत से आग्रह किया कि अकबर के खिलाफ उन्हें सुना जाए। उन्होंने दावा किया कि उनमें से कुछ का अकबर ने यौन उत्पीड़न किया तथा अन्य इसकी गवाह हैं। पत्रकारों ने अपने हस्ताक्षर वाले संयुक्त बयान में कहा, ‘‘रमानी अपनी लड़ाई में अकेली नहीं है। हम मानहानि के मामले में सुनवाई कर रही माननीय अदालत से आग्रह करते हैं कि याचिकाकर्ता के हाथों हममें से कुछ के यौन उत्पीड़न को लेकर तथा अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं की गवाही पर विचार किया जाए जो इस उत्पीड़न की गवाह थीं।

बयान पर दस्तखत करने वालों में मीनल बघेल, मनीषा पांडेय, तुषिता पटेल, कणिका गहलोत, सुपर्णा शर्मा, रमोला तलवार बादाम, होइहनु हौजेल, आयशा खान, कुशलरानी गुलाब, कनीजा गजारी, मालविका बनर्जी, ए टी जयंती, हामिदा पार्कर, जोनाली बुरागोहैन, मीनाक्षी कुमार, सुजाता दत्ता सचदेवा, रेशमी चक्रवाती, किरण मनराल और संजरी चटर्जी शामिल हैं। डेक्कन क्रॉनिकल की एक पत्रकार क्रिस्टीना फ्रांसिस ने भी इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं। अकबर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए सोमवार को रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दायर की थी।

अखबार ‘द टेलीग्राफ’ ने 15 दिन पहले रमानी और न्यूज पोर्टल फर्स्टपोस्ट में एक अनाम लेखिका के ट्वीट पर आधारित खबर चलाई। संयोग की बात है कि अकबर द टेलीग्राफ के संस्थापक संपादक रह चुके हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को अकबर के विरुद्ध लगे आरोपों पर मीडिया को कोई जवाब नहीं दिया। पत्रकारों ने उनसे जब जोर देकर पूछा कि क्या इस मामले में कोई जांच होगी, तो वह बिना उत्तर दिए वहां से चली गईं।

रमानी ने सोमवार को एक लेख के बारे में ट्वीट किया, जिसे उन्होंने 2017 में वोग पत्रिका के लिए लिखा था। उन्होंने कहा, “मैंने अपने इस लेख की शुरुआत मेरी एमजे अकबर स्टोरी के साथ की थी। उनका नाम कभी नहीं लिया क्योंकि उन्होंने कुछ ‘किया’ नहीं था।” उन्होंने अकबर को ‘प्रेडेटर’ भी कहा। रमानी ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, “एक छोटी कहानी ऐसे की तरफ से जिसने उनके साथ काम किया था। एमजे अकबर कभी अवसर को नहीं चूकते थे। अनाम महिला पत्रकार की स्टोरी में अकबर का नाम तो नहीं लिया गया, लेकिन उन्हें बांबे, दिल्ली और लंदन से एकसाथ प्रकाशित होने वाले अखबार (एशियन एज) का बॉस कह कर संबोधित किया गया।

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