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अफजल गुरु के अवशेष कश्मीर वापस लाने के पक्ष में महबूबा मुफ्ती! सांसद लिख चुके हैं चिट्ठी

कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विवादित बयान देते हुए कहा कि अफजल गुरू को फांसी नहीं होनी चाहिए थी।अफजल की फांसी रोकने के लिए हमने राष्ट्रपति को पत्र लिखा था।

महबूबा मुफ्ती । (फाइल फोटो)

कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से राजनीतिक पार्टियां संवेदनशील मुद्दे पर उल्टा-सीधा बयान देकर वोट बैंक साधने की कोशिश शुरू कर दी है। इसी क्रम में कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विवादित बयान देते हुए कहा कि अफजल गुरू को फांसी नहीं होनी चाहिए थी।अफजल की फांसी रोकने के लिए हमने राष्ट्रपति को पत्र लिखा था। प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सरकार को हमन पहले ही चेताया था कि राज्य में अगर डिविजन बनाया जा रहा है तो पीर पांजल और चेनाब के लिए भी डिविडन बनाया जाना चाहिए सिर्फ लद्दाख का ही डिविज बनाने से पीर पांजल और चेनाब के लोग असहज हो जाएंगे। सरकार ऐसा करके राज्य में आग से खेलेने का काम कर रही है।

इतना ही नहीं महबूबा मुफ्ती ने अफजल गुरू के शरीर के अवशेष को कश्मीर में वापस लाने को लेकर भी रजामंदी जताई है। दरअसल मुप्ती ने ऐसा कर पीडीपी के सांसद के सुर में सुर मिलाया है।इससे पहले पीडीपी के सांसद मीर मोहम्मद फयाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद हमले के दोषी अफजल गुरु और जेकेएलएफ के नेता मकबूल भट्ट के शरीर के अवशेष लौटाने की मांग की है। मीर का तर्क है कि ऐसा करने से कश्मीर में अलगाव की भावना कम होगी। मीर का कहना है कि अगर सरकार ऐसा करती है तो लंबे अरसे से लगी घाव पर मरहम लगाने का काम होगा।

मीर का कहना है कि अगर सरकार उनकी बात मानती है तो वह इस बात को पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कश्मीरियों में व्याप्त एक प्रकार की कड़वाहट कम करने में आसानी होगी और अलगाव की भावना भी कम होगी।उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के हत्यारे को जब माफी दी जा सकती है तो फिर एक कश्मीरी लोगों को उनके परिवार वाले का अवशेष देने में कोई बुराई नहीं है।बता दें कि 13 दिसंबर को संसद भवन पर हमले के आरोपी अफजल गुरू को नौ फरवरी 2013 को फांसी पर लटकाया गया था।उसके अवशेष को तिहाड़ जेल में ही दफन कर दिया गया था। जबकि   मकबूल भट को एक खुफिया अधिकारी की हत्या के लिए 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी इसके बाद उसे भी वहीं तिहाड़ जेल में ही दफन कर दिया गया था।

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