ताज़ा खबर
 

मेघालय खदान मामलाः 27 दिन बाद भी खाली हाथ रेस्क्यू टीम, 15 मजदूरों बचाने की जद्दोजहद अब भी जारी

चार हफ्तों से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ मजदूरों के हेलमेट छोड़कर रेस्क्यू टीम को कुछ नहीं मिला। 370 फीट गहरी इस खदान में 100 फीट तक पानी भरा है।

Author Published on: January 9, 2019 12:01 PM
मेघालय की खदान में रेस्क्यू (फोटोः PTI)

मेघालय की पूर्वी जयंतिया हिल्स पर एक अवैध कोयला खदान में करीब चार हफ्तों से फंसे खनन कर्मियों को बचाने का ऑपरेशन अभी भी जारी है। विशाखापटनम से आई गोताखोरों की एक टीम भी इस ऑपरेशन का हिस्सा है। यहां रिमोट से चलने वाले पांच वाहन भी तैनात किए गए हैं। यहां पानी के नीचे आने वाली रूकावटों की भी जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस खदान में काम कर रहे 15 मजदूर 13 दिसंबर को अचानक नदी का पानी घुस जाने से फंस गए थे।

370 फीट गहरी है खदानः चार हफ्तों से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ मजदूरों के हेलमेट छोड़कर रेस्क्यू टीम को कुछ नहीं मिला। 370 फीट गहरी इस खदान में 100 फीट तक पानी भरा है। यहां से पानी निकालने का प्रयास लगातार जारी है। पानी निकालने में जुटा पंप ज्यादा देर काम नहीं कर पा रहा है। वहीं बचाव अभियान के प्रवक्ता आर सुंगसी के मुताबिक पानी का स्तर पता लगाने के लिए पंप को लगातार 10 से 12 घंटे पानी निकालने का काम करना होगा। बचाव टीम आसपास की खाली पड़ी खदानों से भी पानी निकालने में जुटी है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकारः एनजीटी ने इस खदान से खनन पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद यहां से खनन जारी था। इस मामले में रेस्क्यू ऑपरेशन से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि सब मारे जा चुके हैं, कुछ जिंदा हैं, कुछ मारे गए हैं या सभी जिंदा हैं। उन्हें बाहर निकाला जाना चाहिए। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे सभी जिंदा हों।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 Mumbai: बेस्ट कर्मचारियों के करीब 33 हजार कर्मचारियों की हड़ताल से परेशान यात्री, सड़क पर नहीं उतरीं 1812 बसें
2 कुंभ या अर्धकुंभ? नाम पर छिड़ी बहस, योगी ने दिया तर्क तो धर्मगुरु बोले ये परंपरा के खिलाफ
3 नागरिकता विधेयक पारित होने के बाद भाजपा प्रवक्ता ने दिया इस्तीफा