medical topper hina hingad takes jain sadhvi diksha and leaves house - मेडिकल टॉपर, मैट्रिक में लायी थी 94%, जैन संत की दीक्षा लेकर छोड़ा अरबपति पिता का घर - Jansatta
ताज़ा खबर
 

मेडिकल टॉपर, मैट्रिक में लायी थी 94%, जैन संत की दीक्षा लेकर छोड़ा अरबपति पिता का घर

हिना के दीक्षा कार्यक्रम के दौरान उनके चाचा ने बताया कि हिना ने मैट्रिक की परीक्षा में 94 प्रतिशत, जूनियर कॉलेज में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए। हिना लोनी के विखे पाटिल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं।

मेडिकल टॉपर ने जैन धर्म की दीक्षा लेकर अपनाया संन्यासी जीवन। (image source-Video grab image)

महाराष्ट्र के मालेगांव के हिंगड़ परिवार के लिए बुधवार बहुत बड़ी खुशी का दिन था। दरअसल बुधवार को हिंगड़ परिवार की सबसे बड़ी बेटी हिना हिंगड़ ने सूरत में आचार्य यशोवर्मा सुरेश्वर से जैन धर्म की दीक्षा ली और अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरु किया। बता दें कि जैन धर्म की दीक्षा लेने के साथ ही हिना ने अपना घर छोड़ दिया और अब वह एक साध्वी का जीवन बिताएंगी। उल्लेखनीय है कि हिना हिंगड़ हमेशा से ही पढ़ाई में अच्छी रही हैं। हिना के दीक्षा कार्यक्रम के दौरान उनके चाचा ने बताया कि हिना ने मैट्रिक की परीक्षा में 94 प्रतिशत, जूनियर कॉलेज में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए। हिना लोनी के विखे पाटिल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की गोल्ड मेडलिस्ट हैं।

मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद हिना महाराष्ट्र में मुंबई समेत 3 जगहों पर मेडिकल प्रैक्टिस भी कर चुकी हैं। हालांकि हिना को हमेशा से ही लगता था कि मेडिकल का फील्ड उनके लिए नहीं है। हिना के पिता का सपना था कि उनकी बेटी डॉक्टर बने और यही वजह थी कि हिना ने उनकी मर्जी की खातिर मेडिकल की पढ़ाई की। हिना जब 17 साल की थीं, तब पहली बार उनका झुकाव अध्यात्मिकता की तरफ हुआ था और उस वक्त हिना ने 45 दिनों तक ‘उत्थान तप’ किया था। उसके तुरंत बाद ही हिना ने अपने माता-पिता से संघ में शामिल होने की बात कही थी, जिस पर हिना के माता-पिता ने उसे थोड़ा इंतजार करने की बात कही थी। बता दें कि हिना के पिता अशोक हिंगड़ मालेगांव में सिंथेटिक यार्न बनाने का बिजनेस चलाते हैं और अरबपति माने जाते हैं।

हिना 6 बहनों में सबसे बड़ी हैं और बाकी सभी बहनें मुंबई में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। हिना का परिवार मूलतः राजस्थान के पाली का रहने वाला है और पिछली 2 पीढ़ियों से महाराष्ट्र में रह रहा है। हिना की बहन मोक्षदा का कहना है कि हिना ने शादी से इंकार कर दिया था और बार बार परिजनों से साध्वी बनने की आज्ञा देने की विनती कर रही थी। हिना ने सबसे पहले दादा जी को दीक्षा लेने के लिए मनाया। उसके बाद दादाजी ने पूरे परिवार को इसके लिए मनाया। फिलहाल उनका पूरा परिवार हिना के इस फैसले से काफी खुश है। जैन धर्म की दीक्षा लेने के बाद हिना ने केशदान किए और सफेद वस्त्र धारण कर घर छोड़ दिया है और अब हिना साध्वी विषारद माताजी के नाम से जानी जाएंगी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App