बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने सोमवार को शिक्षा, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल को भी आड़े हाथ लिया।
आकाश आनंद ने हाथरस में पार्टी की पहली बड़ी रैली आयोजित की। दरअसल, आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले अब युवा वोटरों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
जेनजी वोटरों को साधने की कोशिश
हाथरस के सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए आकाश ने कहा कि युवा पीढ़ी को ऐसे नेताओं और राजनीतिक दलों को सोच-समझकर चुनना चाहिए जो उनके भविष्य के लिए लड़ें। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक ने दिल्ली में पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए युवा वोटरों से जुड़ने की कोशिश की। 30 साल के आनंद ने कहा, “मैं उसी पीढ़ी से आता हूँ जिसने हाल ही में दिल्ली में पेपर लीक के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था।”
आकाश ने कहा, “शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनकी जगह एक ऐसे व्यक्ति ने ले लिया जिसने महिलाओं के साथ रेप करने वालों की रिहाई पर कहा था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”
‘विरोध-प्रदर्शन के बाद राजनीतिक कदम उठाए जाने चाहिए’
उन्होंने आगे कहा कि विरोध-प्रदर्शन जरूरी हैं, लेकिन उनके बाद राजनीतिक कदम भी उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, “सिर्फ बातचीत करने से सरकार नहीं बदलती। सरकार बातचीत से नहीं झुकती। नीतियां, प्रक्रियाएं और NEET का पेपर नहीं बदला। आपका भविष्य अभी भी वैसा ही है।”
अपने भाषण को “बहनजी का संदेश” बताते हुए आकाश ने कहा, “विरोध-प्रदर्शन करना अच्छी बात है, लेकिन सही कदम उठाना भी उतना ही जरूरी है। सही कदम यह है कि ऐसे नेता और राजनीतिक पार्टी को चुना जाए जो आपके भविष्य के लिए लड़ते हों।”
राहुल और अखिलेश को कहा ‘अंकल’
समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के मुकाबले खुद को एक युवा विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश में, आकाश ने दोनों को अंकल (चाचा) कहा। उन्होंने बताया कि वह 30 साल के हैं, जबकि वे दोनों नेता 50 साल से अधिक उम्र के हैं।
जब सभा में से किसी ने उन्हें सुझाव दिया कि वे अखिलेश को भैया कहकर बुलाएं, तो आकाश ने जवाब दिया, “वह अखिलेश अंकल हैं, अखिलेश भैया नहीं।”
पूर्व सपा सरकार पर साधा निशाना
आकाश ने अखिलेश के नेतृत्व वाली पिछली सपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस सरकार के कार्यकाल में कई दंगे हुए और समाज सुधारकों व महान हस्तियों के नाम पर रखे गए जिलों के नाम बदल दिए गए।
उन्होंने सभा में ही सादाबाद से बसपा उम्मीदवार के नाम की भी घोषणा की। उन्होंने अविन शर्मा विधानसभा का बसपा का उम्मीदवार घोषित किया और वोटरों से अपील की कि वे उनका समर्थन करें और मायावती के दोबारा प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ करें।
आनंद ने की योगी सरकार की आलोचना
भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए, आकाश ने दावा किया कि पिछले 10 सालों में प्रदेश में अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए विज्ञापनों पर 7,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। उन्होंने कहा, “लेकिन उनके पास 4 लाख सरकारी नौकरियों की वैकेंसी भरने, टीचरों को अपॉइंट करने और स्कूल चलाने के लिए पैसे नहीं हैं।” उन्होंने वोटरों से भाजपा से “10 साल का हिसाब” मांगने की अपील की।
कानून-व्यवस्था पर, आकाश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” बताए जाने पर हमला किया और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के डेटा का हवाला देते हुए दावा किया कि यूपी में हत्याओं और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा, “क्या आप ऐसी सरकार को एक और मौका देंगे?” उन्होंने पूछा, “क्या यहां पर कानून का राज है? या फिर पुलिस की आड़ में गुंडों का राज है?”
आकाश ने यह भी दावा किया कि पिछले दस सालों में उत्तर प्रदेश में 25,000 से अधिक स्कूल बंद हो गए हैं और 1.5 लाख सरकारी टीचर की पोस्ट खाली हैं। उन्होंने कहा, “अगर टीचर रखे जाते हैं, तो उन्हें हमारे समाज के छात्रों को पढ़ाना होगा, और हमारे समाज के पढ़े-लिखे बच्चे अपने हक के लिए खड़े होंगे,” उन्होंने इस मुद्दे को आरक्षण, नौकरी, शिक्षा और बेहतर कानून-व्यवस्था की मांगों से जोड़ा।
भाजपा रख रही आकाश पर नजर
पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर हालिया विरोध-प्रदर्शनों और संसद में इन मुद्दों के उठाए जाने के बीच, यूपी में राजनीतिक पार्टियां युवा वोटरों तक पहुंचने की कोशिशें तेज कर रही हैं। इसी माहौल में भाजपा का ध्यान फिर से आकाश आनंद की ओर खिंचा है।
भाजपा में अंदरखाने आकाश की इस ‘री-लॉन्च’ की कोशिश को पहली बार वोट देने वाले और युवा वोटरों के बीच बसपा की अहमियत फिर से कायम करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी अगली जनसभा 25 अगस्त को जेवर में होनी है।
आकाश आनंद को 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा था, उन्हें बसपा के चुनाव प्रचार की कमान सौंपी गई थी, खासकर उत्तर प्रदेश में। हालांकि, मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में एक चुनावी भाषण में कथित तौर पर नफरत फैलाने के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद मायावती ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया और चुनाव प्रचार करने से रोक दिया।
यह भी पढ़ें: यूपी विधानसभा चुनाव 2027: कांग्रेस क्यों सीट शेयरिंग को लेकर सपा से जल्द बात करने पर दे रही जोर, क्या मानेंगे अखिलेश यादव?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन कांग्रेस प्रदेश में अपने सहयोगी राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी (एसपी) के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत जल्द शुरू करने पर जोर दे रही है। इसे लेकर कांग्रेस ने दलील दी है कि गठबंधन का आधार सीटों की संख्या के बजाय जीतने लायक सीटें होनी चाहिए, न कि यह कि कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
